
Ramlila Maidan Rally: नई दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने रैली से पहले केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए दावा किया कि लोगों को रोकने की तमाम कोशिशें भी विपक्ष की ताकत को कम नहीं कर पाएंगी। उनके मुताबिक, यह आयोजन किसी एक राजनीतिक दल का शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की जनता की सामूहिक आवाज बनने जा रहा है।
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की मेगा रैली से पहले विपक्षी नेताओं के तीखे तेवर देखने को मिल रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ऐसी पाबंदियां लोगों के उत्साह को और बढ़ा सकती हैं।
राउत ने बैरिकेडिंग और रास्तों में की जा रही रुकावटों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता अपने इरादे के साथ मैदान तक पहुंचेगी। उनके अनुसार, मौजूदा सरकार को लेकर लोगों में असंतोष है और वे राजनीतिक बदलाव चाहते हैं। उन्होंने इस रैली को किसी एक पार्टी की उपलब्धि या ताकत से जोड़ने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर जनभावनाओं के प्रदर्शन के रूप में पेश किया।
संजय राउत ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि दिल्ली में ऐसे राजनीतिक कार्यक्रम आगे भी आयोजित होते रहेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष राजधानी को अपनी राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाए रखेगा और सरकार के सामने लगातार सवाल उठाता रहेगा।
राउत ने यह भी कहा कि रामलीला मैदान में दिखाई देने वाली भीड़ केवल विपक्षी दलों के समर्थकों का जमावड़ा नहीं होगी, बल्कि इसे देश की सामूहिक राजनीतिक ताकत के तौर पर देखा जाना चाहिए।
रैली के दौरान व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी संजय राउत ने टिप्पणी की। उन्होंने कारोबारियों की परेशानी से जुड़े सवालों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर व्यंग्यात्मक हमला किया। राउत ने कहा कि देश में असली दो व्यापारी मोदी और शाह हैं और नुकसान की चिंता उन्हें ही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राजनीतिक आंदोलनों के कारण यदि उन्हें आर्थिक नुकसान होता है तो इसकी परवाह नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि INDIA गठबंधन की यह रैली मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित की जा रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। वहीं, इन आरोपों पर सत्तारूढ़ पक्ष की अपनी अलग राजनीतिक दलीलें हैं।
रामलीला मैदान का ऐतिहासिक महत्व भी इस आयोजन को खास बनाता है। दिल्ली का यह मैदान पहले भी कई बड़े राजनीतिक आंदोलनों और जनसभाओं का गवाह रहा है। ऐसे में इस बार की रैली पर भी राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।