
भारत (India) में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) 2026 का आयोजन हो रहा है जिसमें शामिल होने के लिए ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्ष राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं। साथ ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के कुछ ऑब्ज़र्वर भी आए हैं। इसी विषय में विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के चेयरमैन और कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने हाल ही में एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर बातचीत की।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले थरूर ने बड़ी बात कह दी। थरूर ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चल रहे तनाव का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत जानता है कि सख्त रुख कैसे अपनाना है। ब्रिक्स जैसे मंच पर चीन के साथ बहुपक्षीय सहयोग जारी रखकर भारत समझदारी भरा काम कर रहा है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी कि द्विपक्षीय हकीकत को व्यापक मंच के उद्देश्यों के साथ नहीं मिलाना चाहिए। थरूर ने गलवान घाटी में हुए मामले के बारे में बात करते हुए कहा, "गलवान में चीन की तरफ से बिना किसी उकसावे के घुसपैठ की गई, जिसमें हमारे 20 जवान शहीद हो गए। हम साफ तौर पर चीन के साथ पुराने संबंध बहाल करना चाहेंगे, जो अभी तक पूरी तरह से नहीं हो पाया है।"
भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन पर एक अन्य इंटरव्यू में थरूर ने कहा, "सबसे पहले हम 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक अहम मंच उपलब्ध करा रहे हैं। आप जानते हैं कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज़्यादा देश शामिल हैं, लेकिन यहाँ हमारे साथ ग्लोबल साउथ के 11 मुख्य देश हैं। ये देश मिलकर विचारों की विविधता और उन देशों के समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी अध्यक्षता हम इस खास मौके पर कर रहे हैं। 11 ब्रिक्स देशों का यह समूह दुनिया की ज़्यादातर आबादी और ग्लोबल जीडीपी के 41% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है और बाकी दुनिया को इसे बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।"
"दूसरी बात यह है कि एक दर्जन राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के प्रमुखों का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत आना, जिनमें न सिर्फ ब्रिक्स सदस्य शामिल हैं, बल्कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के कुछ ऑब्ज़र्वर भी हैं, हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। यह एक तरह की कूटनीतिक एकजुट करने की क्षमता को दिखाता है, जिसकी वैश्विक मंच पर अपनी एक अहमियत है।"