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‘आग का गोला’ पर सख्ती…अवैध रूप से नहीं बनेंगी स्लीपर बसें

पिछले 3 महीने में अवैध रूप से बनी कई स्लीपर बसें हादसों का शिकार हो चुकी हैं। ऐसे में अब इस मामले में केंद्र सरकार सख्त हो गई है।

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Jan 09, 2026
Sleeper buses (Photo - IANS)

'आग का गोला' बनकर तीन महीने में राजस्थान (Rajasthan), तेलंगाना (Telangana) और कर्नाटक (Karnataka) सहित अन्य राज्यों में 145 यात्रियों की मौत का सबब बनी स्लीपर बसें (Sleeper Buses) गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। ऐसे में अब केंद्र सरकार इन बसों पर सख्ती बरतने जा रही है। परिवहन मंत्रालय ने अब फैसला किया है स्लीपर कोच बसों का निर्माण अब अधिकृत ऑटोमोबाइल कंपनियाँ ही कर सकेंगी और सामान्य बस चेसिस पर अवैध रूप से ऐसी बसें नहीं बनाई जा सकेंगी।

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गडकरी ने की बैठक

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने इस सिलसिले में 27 राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ बैठक के बाद इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्लीपर बसों पर सख्ती को लेकर कायदे-कानून में बदलाव और नए दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में इस तरह के हादसों को होने से रोका जा सके। गडकरी ने बताया कि आने वाले संसद सत्र में सड़क सुरक्षा सहित 8 प्रमुख विषयों पर मोटर वाहन कानून में 61 संशोधन करने का विधेयक लाएंगे।

खराब डिज़ाइन के कारण हुए हादसे

गडकरी ने बताया कि खराब डिज़ाइन और घटिया गुणवत्ता की सामग्री के कारण स्लीपर बसों में हादसे हुए। 1 सितंबर 2025 को संशोधित बस बॉडी कोड लागू होने के बाद मैन्यूफैक्चर्स टेस्टिंग एजेंसी से अप्रूवल सर्टिफिकेशन लेने के बाद बसों का रजिस्ट्रेशन हो सकता है लेकिन कुछ बसें बिना अप्रूवल के रजिस्टर हो रहीं हैं। सरकार ने इस मामले में फोरेंसिक पोस्ट क्रैश इनवेस्टिगेशन करवाया और उसके आधार पर ज़रूरी निर्णय लिए हैं।

दुर्घटना के बाद कैशलेस इलाज पूरे देश में लागू होगा

गडकरी ने बताया कि परिवहन मंत्रियों की बैठक में दुर्घटना के बाद कैशलेस ट्रीटमेंट पर तैयारियों के बारे में चर्चा हुई। यूपी, हरियाणा, असम, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड और पुदुचेरी में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद यह व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी। इसके तहत हादसे में घायल व्यक्तियों के लिए अधिकतम 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये का निशुल्क इलाज होगा। घायलों को अस्पताल में पहुंचाने वाले को भी 25 हजार रुपये मिलेंगे।

बस बॉडी कोड को लेकर ये निर्णय लिए गए

■ स्लीपर कोच बसों का निर्माण अब केवल ऑटोमोबाइल कंपनियाँ ही करेंगी।

■ बस निर्माण/सुविधा इकाइयों की मान्यता (एक्रिडिटेशन) केंद्र सरकार देगी

■ मौजूदा बसों में आग का पता लगाने की प्रणाली, हथौड़ों सहित आपातकालीन निकास, आपातकालीन लाइटें और चालक की उनींदापन पहचानने वाली प्रणाली लगाई जाएगी।

सिटी बसों में होंगे ये सुधार

■ सभी सिटी बसें दिव्यांगजन फ्रेंडली होंगी

■ वृद्ध और दिव्यांगों के लिए बस में हाइड्रोलिक नीलिंग, व्हीलचेयर और रैंप होगा।

■ सिटी बस लो-फ्लोर हाईट की होंगी।

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