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सोनम वांगचुक ने मोदी सरकार को लिखी चिट्ठी, कहा- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बात होनी चाहिए

Sonam Wangchuk Hunger Strike: नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर छात्रों पर कार्रवाई रोकने, संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।
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Updated: 22 Jul 2026, 5:50 PM IST
Sonam Wangchuk hunger strike
सोनम वांगचुक ने मोदी सरकार को लिखी चिट्ठी (Photo-IANS)

Sonam Wangchuk Letter To Modi Government: नीट पेपर लीक, परीक्षाओं में गड़बड़ी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर है। उन्होंने बुधवार को मोदी सरकार को एक चिट्ठी लिखी है। जिसमें छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने की अपील की है। वांगचुक ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने की भी मांग की है। 

भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक ने अपनी चिट्ठी में लिखा- छात्रों के खिलाफ सरकार द्वारा कार्रवाई ना हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवार को मुआवजा दिया जाए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बात होनी चाहिए।

मंत्रियों को दिया धन्यवाद

अपनी चिट्ठी में सोनम वांगुचक ने अस्पताल आकर उनका हालचाल लेने और अनशन समाप्त करने की अपील के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह  का धन्यवाद किया। 

उन्होंने कहा कि मंत्रियों ने दो प्रमुख मांगों पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया है। इनमें नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा और जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी विचार शामिल हैं। 

'संसद चलो' मार्च का किया जिक्र

सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग और ज्यादतियों के बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज न किया जाए, न ही उन्हें किसी तरह से परेशान या प्रताड़ित किया जाए।

सोनम वांगचुक ने अपनी चिट्ठी में लिखा- विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या अस्पताल पहुंचकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। साथ ही शिक्षा सुधार के लिए अपना अभियान जारी रखने की भी बात कही है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह ऐसा उन युवाओं की कीमत पर नहीं कर सकते, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू किया गया था।

उन्होंने कहा कि इन युवाओं का एकमात्र अपराध निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग उठाना है। इसलिए सरकार को स्पष्ट रूप से भरोसा देना चाहिए कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई नहीं की जाएगी।

Updated on:
22 Jul 2026, 5:50 PM IST
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