
Belonging A Journey of Love: लंबे समय तक निजी जिंदगी को परदे में रखने वाली सोनिया गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया की दुनिया में दस्तक दी। इंस्टाग्राम पर उनकी पहली पोस्ट ने राजनीतिक और आम दोनों हलकों में चर्चा छेड़ दी। एक छोटे वीडियो के जरिए उन्होंने अपनी आने वाली किताब का कवर दिखाया और भावुक अंदाज में शुक्रिया अदा किया। यह सिर्फ सोशल मीडिया की शुरुआत नहीं, बल्कि उनके जीवन की अनकही दास्तानों को दुनिया के सामने लाने का पहला कदम लगता है। युद्ध के बाद के इटली से लेकर नेहरू-गांधी परिवार तक का सफर अब उनके शब्दों में सामने आने वाला है।
समाचार एजेंसी ANI और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट खोलते ही एक छोटा सा वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में किताब का कवर साफ दिख रहा था। उन्होंने लिखा, “हेलो एवरीवन, मैं आप सभी के साथ यह पल शेयर करके सच में बहुत शुक्रगुजार हूं; "Belonging: A Journey of Love” उन्होंने इसे प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनी जगह तलाशने की कहानी बताया।
सोनिया गांधी ने अपनी पहली पोस्ट में पाठकों के प्रति आभार जताते हुए किताब की झलक साझा की। उन्होंने लिखा कि यह कहानी प्यार, कर्तव्य, बिछड़ने और अपनेपन की तलाश से जुड़ी है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि पाठक उनके इस सफर से जुड़ सकेंगे।
किताब का नाम “बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव” है। पब्लिशर अल्फ्रेड ए नोफ (पेंगुइन रैंडम हाउस का हिस्सा) ने अगस्त में ही घोषणा की थी कि यह 10 नवंबर को रिलीज होगी। भारत में हार्परकॉलिन्स इंडिया इसे छाप रहा है। करीब 544 पेज की यह आत्मकथा सोनिया के बचपन से शुरू होती है। युद्ध के बाद इटली के वेनेटो इलाके में गुजरा बचपन, फिर कैम्ब्रिज में अंग्रेजी पढ़ने का सफर। वहीं 1965 में 19 साल की उम्र में राजीव गांधी से मुलाकात हुई। दोनों एक-दूसरे को पहली नजर में भा गए। 25 फरवरी 1968 को शादी हुई और सोनिया भारत आ गईं।
किताब में सास इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात, हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय खान-पान अपनाने जैसे किस्से भी हैं। राजीव एयरलाइंस पायलट थे। परिवार शांति से चल रहा था, लेकिन फिर त्रासदियां आईं। संजय गांधी की प्लेन क्रैश में मौत, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या। इन घटनाओं ने सोनिया की जिंदगी और भारत में उनकी जगह दोनों बदल दीं। उन्होंने खुद कहा है कि दुख और नुकसान ने ही उन्हें राजनीति में धकेला। पहले वे अपनी निजता को बहुत संभालकर रखती थीं।
दिलचस्प बात यह है कि किताब के प्रकाशन को लेकर कुछ विवाद भी रहा। पहले पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से बात चल रही थी, लेकिन कुछ संपादकीय मुद्दों पर मतभेद होने की खबरें आई। बाद में हार्परकॉलिन्स ने भारत में प्रकाशन की जिम्मेदारी ली। अंतरराष्ट्रीय संस्करण अल्फ्रेड ए नोफ ही छाप रहा है। पहली छपाई एक लाख प्रतियों की बताई जा रही है।
राजीव गांधी की हालिया 82वीं जयंती पर बेटे राहुल गांधी ने भी किताब का जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था कि उन्हें खुशी और गर्व है कि मां की खूबसूरत कहानी अब लाखों लोग पढ़ेंगे। प्राइवेट स्वभाव वाली मां के लिए यह आसान नहीं था। राहुल ने कल्पना की कि पापा मुस्कुराते हुए सोनिया को गर्व से देख रहे होंगे। बेटी प्रियंका ने भी मां को बहादुर और वफादार बताया था।
सोनिया गांधी इंस्टाग्राम पर सिर्फ तीन अकाउंट फॉलो कर रही हैं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस का आधिकारिक पेज। पोस्ट के कुछ ही मिनटों में उनके फॉलोअर्स बढ़ने लगे। यह देखकर लगता है कि वे अब अपनी कहानी खुद बताना चाहती हैं। किताब में 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने का जिक्र भी होने की उम्मीद है। छह दशक के भारत के सामाजिक-राजनीतिक बदलावों पर उनका नजरिया भी इसमें शामिल होगा।