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सत्ता-विपक्ष की अड़ा-अड़ी में बर्बाद हो गए जनता के 171 करोड़ रुपए

संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच अड़ा-अड़ी देखने को मिली, जिसकी वजह से जनता के 171 करोड़ रूपए बर्बाद हो गए। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।
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Aug 14, 2026
Lok Sabha
लोकसभा (Photo - ANI)

संसद का मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) गुरुवार को तल्खी और गतिरोध के बीच खत्म हो गया। पूरे सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव इतना हावी रहा कि संसद में देश के कई ज्वलंत मुद्दों के साथ कानून बनाने की प्रक्रिया पर गंभीर चर्चा नहीं हो सकी। ऐसे में संसद की कार्यवाही पर जनता के करीब 171 करोड़ रुपए हंगामे की वजह से बर्बाद हो गए।

बेहद कम रही प्रोडक्टिविटी

सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में खदान से जुड़ा विधेयक बिना चर्चा के पारित हुआ। दरअसल संसद के मानसून सत्र की शुरुआत पेपर लीक के मुद्दे पर हंगामे से हुई। वहीं सत्र का समापन छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्यवाही और राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर चर्चा की मांग पर हंगामे से हुआ। दिलचस्प बात है कि सत्ता पक्ष ने हमेशा हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार रहने की बात कही वहीं विपक्ष चर्चा की मांग करता रहा लेकिन कभी नियमों की ताे कभी समय की दुहाई देते हुए दोनों पक्ष अड़े रहे और गतिरोध व हंगामे में सत्र बीत गया। संसद में 12 विधेयक पास किए गए, लेकिन चर्चा सिर्फ 1 पर ही हुई। इस बार के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में सिर्फ 19% और राज्यसभा में 39% कामकाज हुआ।

संसद को चलाने का अनुमानित खर्च कितना?

संसद को चलाने के लिए एक घंटे में करीब 1.5 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। एक दिन में करीब 9 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। मानसून सत्र के दौरान हुई 19 बैठकों में 171 करोड़ का खर्च सांसदों पर किया गया, लेकिन इसके बावजूद संसद में कार्यवाही और चर्चा से ज़्यादा हंगामा हावी रहा।

पहली बार सदन में पूरा वंदे मातरम्

मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही पहली बार पूरे वंदे मातरम् के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi), गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah), नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और सभी सांसद मौजूद रहे। वंदे मातरम् के 6 स्टैंजा बजाए जाने के बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) की ओर से वंदे मातरम् को कानूनी सुरक्षा देने वाले कानून को मंजूरी देने के बाद यह कदम उठाया गया।

Updated on:
14 Aug 2026 02:17 am
Published on:
14 Aug 2026 02:17 am