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Strait Of Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही तेल-गैस की कीमतों में भारी गिरावट, अब नहीं होगी किल्लत

Strait Of Hormuz News: ईरान द्वारा 49 दिन बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिली है। तेल और गैस की कीमतों में भारी गिरावट आई है। भारत समेत कई देशों के लिए सप्लाई आसान हुई है, हालांकि यह फैसला फिलहाल युद्धविराम अवधि तक सीमित है।

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Apr 17, 2026
Strait Of Hormuz(AI Image-ChatGpt)

Strait Of Hormuz: मिडिल ईस्ट से शुक्रवार को आई एक खबर ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को हिला दिया। लेकिन इस बार राहत के साथ। करीब 49 दिनों तक बंद रहने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल दिया गया है। ईरान के इस फैसले का सीधा असर तेल और गैस की कीमतों पर देखने को मिला। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने घोषणा करते हुए कहा कि लेबनान में जारी संघर्ष-विराम की अवधि तक अब इस समुद्री रास्ते से सभी कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य रहेगी। यानी फिलहाल के लिए दुनिया की सबसे अहम 'ऑयल रूट' फिर से चालू हो गई है।

कीमतों में गिरावट


जैसे ही यह ऐलान हुआ, अंतरराष्ट्रीय बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया हुई। तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 8–9 प्रतिशत तक टूट गई और यह लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 9 प्रतिशत गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। गैस बाजार भी पीछे नहीं रहा। यूरोप के गैस कॉन्ट्रैक्ट्स में भी करीब 8.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। साफ है कि बाजार को इस फैसले का इंतजार था, और जैसे ही रास्ता खुला दाम नीचे आने लगे।

डोनाल्ड ट्रंप का आया बयान


इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया कि ईरान के साथ चल रहा तनाव जल्द किसी समझौते की ओर बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने कोई तय समयसीमा नहीं बताई, लेकिन उनके इस बयान ने बाजार में भरोसा जरूर बढ़ाया। होर्मुज स्ट्रेट का महत्व समझना जरूरी है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में जब यह बंद होता है, तो सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है और कीमतें बढ़ जाती हैं। पिछले कुछ हफ्तों में यही देखने को मिला था।

भारत जैसे देशों के लिए यह खबर खास राहत लेकर आई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। जब यह रास्ता बंद हुआ था, तब तेल और खासकर गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया था। अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। रास्ता खुलने से टैंकरों की आवाजाही फिर से आसान होगी और सप्लाई चेन सुधरेगी। इससे आने वाले दिनों में कीमतों में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।

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