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Student Suicide: इस राज्य में छात्रों की आत्महत्या में हुई वृद्धि, तीन साल के आंकड़े देख चौंक जाएंगे आप

Student Suicide: देशभर में आत्महत्या के मामले बढ़ते ही जा रही है। कुछ राज्यों में सुसाइड केस में वृद्धि दर्ज की गई है। इस लिस्ट में ओडिशा का नाम भी शामिल है।

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Student Suicide: देशभर में आत्महत्या के मामले बढ़ते ही जा रही है। कुछ राज्यों में सुसाइड केस में वृद्धि दर्ज की गई है। इस लिस्ट में ओडिशा का नाम भी शामिल है। इस राज्य में पिछले साल 2023 में 189 छात्रों की आत्महत्या से मौत हो गई। यह 2021 में 119 मौतों की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत की वृद्धि है। सोमवार को ओडिशा विधानसभा यह जानकारी दी गई। बीजू जनता दल विधायक ध्रुबा चरण साहू द्वारा पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि 2021 से 2023 के बीच राज्य में 218 लड़कों और 263 लड़कियों सहित 481 छात्रों ने आत्महत्या की है।

2023 में 189 छात्रों ने किया सुसाइड

सीएम माझी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 119 छात्रों ने आत्महत्या की, जिसमें 58 लड़के और 61 लड़कियां शामिल थीं, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 189 हो गई - 85 लड़के और 104 लड़कियां। 2022 में, राज्य भर में 75 लड़कों और 98 लड़कियों सहित 173 छात्रों ने आत्महत्या की है।

लड़कियों की आत्महत्या दर चिंताजनक

आंकड़ों से यह भी पता चला है कि 2021 से 2023 के बीच लड़कियों की आत्महत्या के मामलों में वृद्धि की दर लड़कों की तुलना में बहुत अधिक (लगभग 70 प्रतिशत) है। सीएम माझी ने कहा कि 2021 से 2023 तक राज्य में किसानों द्वारा आत्महत्या के केवल चार मामले सामने आए हैं।

2023 में कुल 5,989 आत्महत्या के मामले दर्ज

आंकड़ों से यह भी पता चला है कि राज्य में 2023 में कुल 5,989 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए, जो 2022 में 6,140 मामलों की तुलना में 2.4 प्रतिशत की गिरावट है। 2021 में, राज्य में 5,649 लोगों की आत्महत्या से मृत्यु हुई।

जानिए क्या हैं एक्सपर्ट

डॉ. अमृत पट्टोजोशी, मानद सचिव भारतीय मनोरोग सोसायटी ने कहा, ओडिशा में छात्रों की आत्महत्या में खतरनाक वृद्धि बढ़ती प्रतिस्पर्धा, उच्च सामाजिक और पारिवारिक अपेक्षाओं और व्यस्त माता-पिता के कार्यक्रमों के कारण भावनात्मक समर्थन की कमी जैसे कारकों से प्रेरित है। गैजेट्स और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग छात्रों को और अलग-थलग कर देता है, जिससे तनाव सहन करने और मुकाबला करने के कौशल कमजोर हो जाते हैं।

पट्टोजोशी ने कहा, इसके अलावा, सहनशीलता में कमी के कारण असफल रिश्ते, आसान पहुंच के कारण मादक पदार्थों का सेवन और सामाजिक अलगाव इस संकट को और बढ़ा देते हैं, जो सामाजिक करुणा की कमी से और भी बढ़ जाता है।

Updated on:
03 Sept 2024 02:13 pm
Published on:
03 Sept 2024 08:59 am
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