
Shiv Sena UBT merger case in Supreme Court: शिवसेना (UBT) सांसदों के शिंदे गुट में विलय का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में बुधवार को उद्धव गुट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में छह बागी सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता देने के फैसले को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने विलय पर तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा सचिवालय के सचिव और शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों को नोटिस जारी किया। पीठ ने सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की।
शिवसेना (UBT) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत से कहा कि यह मामला संवैधानिक नैतिकता और संवैधानिक मर्यादा से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।
कामत ने कहा, 'ये छह सांसद हमारी पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुने गए थे। इनके खिलाफ कोई अयोग्यता की कार्यवाही लंबित नहीं है। ऐसे में विलय पर फैसला लेने का सवाल ही नहीं उठता। कृपया उस सर्कुलर को देखिए, जिस पर केवल एक संयुक्त सचिव के हस्ताक्षर हैं। हमें यह भी नहीं पता कि स्पीकर ने इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश पारित किया है या नहीं।'
गौरतलब है कि 18 जुलाई को संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद लोकसभा में शिवसेना (UBT) के सांसदों की संख्या घटकर तीन रह गई।
लोकसभा अध्यक्ष ने शिवसेना (UBT) के छह सांसद संजय जाधव, संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, नागेश पाटिल अष्टीकर और भाऊसाहेब वाकचौरे के शिंदे गुट की शिवसेना में विलय को मान्यता दी। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, इस विलय के बाद लोकसभा में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई।