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जो कभी ममता के बेहद करीबी थे फिर बने बागी, कहानी सत्ता उखाड़ फेंकने वाले ‘जाइंट किलर’ सुवेंदु अधिकारी की

Giant Killer Suvendu Adhikari Story: ऐसा माना जाता है कि टीएमसी में अभिषेक बनर्जी के उभार के बाद शुभेंदु का कद घटता गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भी उनके मतभेद सामने आए।

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May 09, 2026
फोटो में सुवेंदु अधिकारी और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी (इमेज सोर्स: आईएएनएस)

Suvendu Adhikari vs Mamata Banerjee: नगरपालिका पार्षद से शुरुआत कर 31 साल का राजनीतिक सफर तय करते हुए 56 साल के सुवेंदु अधिकारी प.बंगाल के मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए। अजय मुखर्जी के बाद मेदिनीपुर जिले से दूसरे सीएम बनने वाले सुवेंदु पुराने कांग्रेसी हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी डॉ.मनमोहन सिंह सरकार में केंद्र में मंत्री रहे, उनके दो भाई दिब्येंदु और सोमेंदु भी सांसद रहे लेकिन कांग्रेस छोड़ पहले संघर्षशील ममता बनर्जी के साथ सुवेंदु टीएमसी में चले गए। वामपंथियों के दशकों के शासन को उखाड़ने वाले टीएमसी के नंदीग्राम आंदोलन की नींव सुवेंदु ही थे। बाद में ममता से मतभेद हुए तो छह साल पहले भाजपा का दामन थाम ममता का शासन उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाई। सुवेंदु की राजनीति में पकड़ है, प्रशासनिक अनुभव है तो समीकरणों को पूरी तरह समझते हैं।

ममता के बाद नंबर-2 नेता की छवि

तृणमूल कांग्रेस में शुभेंदु अधिकारी और उनके परिवार का ग्राफ तेजी से ऊपर गया। 2014 में शुभेंदु दोबारा सांसद चुने गए। पार्टी में भी उनकी छवि ममता बनर्जी के बाद नंबर-दो नेता के तौर पर बन गई। 2016 में शुभेंदु ने सांसद रहते हुए ही नंदीग्राम से चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद वह ममता सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।

शाह ने ही भाजपा ज्वाइन कराई थी

ऐसा माना जाता है कि टीएमसी में अभिषेक बनर्जी के उभार के बाद शुभेंदु का कद घटता गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भी उनके मतभेद सामने आए। इसके बाद 10 नवंबर 2020 को उन्होंने नंदीग्राम में एक रैली आयोजित कर बागी तेवर दिखाए। 17 दिसंबर 2020 को उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दिया और गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए।

जन्म: 15 दिसंबर 1970
शिक्षा: रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से कला में परास्नातक

राजनीतिक सफर: 1995-कांग्रेस पार्षद, कांथीनगर नगर पालिका

1998: कांग्रेस छोड़ ममता बनर्जी की टीएमसी में शामिल
2006: कांथीनगर से टीएमसी विधायक बने, नंदीग्राम में ममता के साथ आंदोलन की नींव
2009 व 2014: टीएमसी से लोकसभा सांसद, टीएमसी में नं.2 की हैसियत
2016: सांसद रहते नंदीग्राम से विधायक का चुनाव जीता, मंत्री बने
2019: ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के उभार के बाद टीएमसी में कद घटा।
2020: नंदीग्राम में टीएमसी से बागी तेवर दिखाए, नवंबर में टीएमसी छोड़ भाजपा में शामिल
2021: नंदीग्राम विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराया, भाजपा मुख्य विपक्षी दल बना, सुवेंदु नेता प्रतिपक्ष
2026: भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता बनर्जी को हराया, सीएम चुने गए।

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