तमिलनाडु के एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने छात्रों का सपना पूरा करते हुए 20 बच्चों को पहली बार फ्लाइट यात्रा कराई। मल्टीप्लिकेशन टेबल प्रतियोगिता के जरिए चुने गए छात्रों ने चेन्नई का शैक्षणिक टूर भी किया।
तमिलनाडु के एक छोटे से गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए हवाई जहाज में सफर करना कभी दूर का सपना था। साधारण परिवारों से आने वाले इन छात्रों ने शायद ही कभी सोचा था कि वे आसमान में उड़ने वाले विमान में बैठ पाएंगे। लेकिन स्कूल के प्रिंसिपल ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया। तेनकासी जिले के कोंडनूर गांव स्थित सरकारी मिडिल स्कूल के प्रिंसिपल माइकल राज ने 20 छात्रों और आठ शिक्षकों के लिए विशेष शैक्षणिक यात्रा का आयोजन किया, जिसमें बच्चों को पहली बार हवाई जहाज से यात्रा करने का मौका मिला।
इस अनोखी पहल की शुरुआत एक कक्षा में पढ़ाए जा रहे राइट ब्रदर्स के पाठ से हुई। पढ़ाई के दौरान प्रिंसिपल माइकल राज ने छात्रों से उनके सपनों के बारे में पूछा। कई बच्चों ने अलग अलग इच्छाएं बताईं, लेकिन लगभग सभी ने कहा कि वे जिंदगी में कम से कम एक बार हवाई जहाज में उड़ना चाहते हैं। बच्चों की इस इच्छा ने प्रिंसिपल को भावुक कर दिया और उन्होंने इसे पूरा करने का फैसला कर लिया। लगभग तीन महीने पहले उन्होंने 20 छात्रों और आठ शिक्षकों के लिए मदुरै से चेन्नई तक इंडिगो फ्लाइट की टिकट बुक की। हालांकि उन्होंने इसे पढ़ाई से जोड़ने के लिए एक प्रतियोगिता भी रखी।
प्रिंसिपल ने छात्रों से कहा कि जो भी छात्र 1 से 20 तक और 16 के पहाड़े तक मल्टीप्लिकेशन टेबल पूरी तरह याद करके सुना देगा, उसे इस फ्लाइट यात्रा का मौका मिलेगा। यह सुनते ही छात्रों में जबरदस्त उत्साह पैदा हो गया। बच्चे रोज अभ्यास करने लगे और प्रतियोगिता के लिए मेहनत करने लगे। आखिरकार 20 छात्रों का चयन किया गया। यात्रा की शुरुआत ट्रेन से हुई, जहां छात्र पहले मदुरै जिले के तिरुपरंकुंद्रम पहुंचे। वहां से वैन के जरिए उन्हें एयरपोर्ट ले जाया गया और फिर उन्होंने चेन्नई के लिए अपनी पहली फ्लाइट पकड़ी।
फ्लाइट यात्रा के बाद बच्चों के लिए यह टूर एक शानदार शैक्षणिक अनुभव में बदल गया। चेन्नई पहुंचने के बाद छात्रों ने शहर के कई प्रमुख स्थानों का दौरा किया। इनमें बिरला प्लैनेटोरियम, मरीना बीच, वल्लुवर कोट्टम और अरिग्नर अन्ना जूलॉजिकल पार्क शामिल थे। इन जगहों पर बच्चों ने विज्ञान, इतिहास और प्रकृति से जुड़ी कई नई चीजें देखीं और सीखी। दो दिन की इस यात्रा के बाद पूरा समूह पोथिगई एक्सप्रेस ट्रेन से अपने गांव वापस लौटा।