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“टीम इंडिया पर शर्म आती है” इस पूर्व क्रिकेटर ने कप्तान सूर्यकुमार यादव और जय शाह पर किया तीखा प्रहार, जानें कारण

टी-20 विश्व कप जीत के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव द्वारा ट्रॉफी के साथ अहमदाबाद के हनुमान मंदिर में पूजा करने पर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आजाद ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं और कहा कि भारतीय टीम पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है, किसी एक धर्म का नहीं।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 09, 2026

Kirti Azad sharply criticized captain Suryakumar Yadav and Jay Shah(Image-ANI)

T20 World Cup Final 2026: भारत ने रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को हराकर टी-20 विश्व कप अपने नाम किया। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रचा। पूरे देश में जीत का जश्न मनाया गया और खिलाड़ियों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि एक नया विवाद सामने आ गया। दरअसल, फाइनल के अगले ही दिन भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव, आईसीसी अध्यक्ष जय शाह और टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर अहमदाबाद के एक हनुमान मंदिर पहुंचे। खास बात यह रही कि सूर्यकुमार यादव विश्व कप की ट्रॉफी भी अपने साथ मंदिर लेकर गए और वहां पूजा-अर्चना की। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गए।

टीएमसी सांसद Kirti Azad ने दी प्रतिक्रिया


जहां कई लोग इसे खिलाड़ियों की आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने इस पर सवाल भी उठाए हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कीर्ति आजाद 1983 की उस ऐतिहासिक भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं जिसने कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इस कदम की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि भारतीय टीम पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है, किसी एक धर्म या परिवार का नहीं।

T20 World Cup Final: ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर उठाया सवाल


उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि 1983 की टीम में हर धर्म के खिलाड़ी थे- हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई। उस समय जब टीम विश्व कप जीतकर लौटी थी, तब ट्रॉफी को पूरे भारत की जीत के रूप में देखा गया था, न कि किसी एक धार्मिक पहचान से जोड़ा गया था। कीर्ति आजाद ने सवाल उठाया कि ट्रॉफी को मंदिर ले जाया गया, लेकिन मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे में क्यों नहीं? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर मोहम्मद सिराज ट्रॉफी को मस्जिद ले जाते या संजू सैमसन चर्च लेकर जाते तो क्या वही बात स्वीकार की जाती?

उन्होंने यह भी लिखा कि संजू सैमसन ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। ऐसे में यह जीत सिर्फ किसी एक व्यक्ति या धर्म की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। उनके मुताबिक ट्रॉफी को किसी एक धार्मिक स्थान से जोड़ना सही संदेश नहीं देता।