बंबई उच्च न्यायालय ने एक दंपति की शादी इस आधार पर रदद कर दी क्योंकि पति अपनी पत्नी से संबंध ही नहीं बना रहा था
बंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने एक दंपति की शादी को निरस्त कर दिया। यह पति पत्नी आपस में यौन संबंध नहीं बना पा रहे थे। इसे पीछे ‘रिलेटिव इंपोटेंसी’ को कारण माना गया। न्यायमूर्ति विभा कांकणवाड़ी और न्यायमूर्ति एस जी चपलगांवकर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि यह ऐसे युवाओं की मदद करने का उपयुक्त मामला है जो शादी के बाद भी एक-दूसरे के साथ मानसिक, भावनात्मक या शारीरिक रूप से नहीं जुड़ पाए।
क्या है ‘रिलेटिव इंपोटेंसी’?
‘रिलेटिव इंपोटेंसी’ एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति किसी विशेष व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने में असमर्थ हो सकता है लेकिन दूसरे व्यक्तियों के साथ वह संबंध बनाने में सक्षम हो सकता है। यह सामान्य नपुंसकता से भिन्न स्थिति होती है। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि यह एक जानी-पहचानी और सामान्य नपुंसकता से अलग स्थिति है। इसकी विभिन्न वजह हो सकती हैं।
पत्नी का खारिज हुआ केस तो पति पहुंचा अदालत
इस मामले में जब पत्नी का दायर केस पारिवारिक अदालत में खारिज हो गया तो उसके पति ने फरवरी 2024 में उच्च न्यायालय में केस दायर किया। उसने यह बताया कि वह आगे विवाह जारी नहीं रखना चाहता है। इसकी वजह प्रत्यक्ष तौर पर शारीरिक संबंध बना पाने की अक्षमता है। पारिवारिक अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि पति और पत्नी ने मिलीभगत से ये दावे किए हैं। वहीं अब उच्च न्यायालय ने पारिवारिक अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और शादी को भी निरस्त कर दिया।
साहस नहीं जुटा पा रहा था पति
अदालत ने कहा कि वह पहले पत्नी को जिम्मेंदार ठहरा रहा था क्यों कि वह सच को स्वीकार करने का साहस नहीं कर पा रहा था कि वह अक्षम है। वह यह नहीं चाहता था कि यह मैसेज जाए कि वह नपुंसक है। दोनों ने मार्च 2023 में शादी की थी लेकिन 17 दिन बाद ही अलग हो गए। उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं बने और पति ने ही महिला से संबंध बनाने से इनकार कर दिया।