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तिरुपति बालाजी मंदिर में 24 घंटे में 96.98 करोड़ का रिकॉर्ड दान, जानिए क्यों उमड़े श्रद्धालु, अब आजीवन नहीं मिलेंगी ये खास सुविधाएं

Tirupati Balaji: तिरुपति बालाजी मंदिर में नई टीटीडी डोनर पॉलिसी लागू होने से पहले 24 घंटे में रिकॉर्ड 96.98 करोड़ रुपये का दान मिला। जानिए नई डोनर पॉलिसी में क्या बदलाव हुए, आजीवन सुविधाओं पर क्या असर पड़ेगा और क्यों उमड़े हजारों श्रद्धालु।
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Jul 16, 2026
Tirupati Balaji Temple
तिरुपति बालाजी मंदिर में 24 घंटे में रिकॉर्ड दान

Tirupati Temple News: तिरुमला स्थित विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में नई डोनर पॉलिसी लागू होने से ठीक पहले दान देने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंगलवार को महज 24 घंटे के भीतर मंदिर को 96.98 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड दान मिला। यह बढ़ोतरी नई नीति लागू होने से पहले आजीवन मिलने वाली दाता सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए हुई, क्योंकि 15 जुलाई की मध्यरात्रि से नई व्यवस्था लागू हो गई है।

24 घंटे में 2,460 श्रद्धालुओं ने किया दान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को कुल 2,460 श्रद्धालुओं ने मंदिर को दान दिया। इनमें 1,212 लोगों ने 1 लाख से 10 लाख रुपये के बीच दान दिया, जबकि 1,246 श्रद्धालुओं ने 10 लाख से 25 लाख रुपये तक का दान किया। इसके अलावा दो भक्तों ने 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अर्पित की।

नई पॉलिसी से पहले क्यों बढ़ा दान?

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की नई डोनर पॉलिसी 15 जुलाई की मध्यरात्रि से लागू हो गई है। इसके तहत दानदाताओं को मिलने वाले विशेषाधिकारों में बड़ा बदलाव किया गया है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब नए दानदाताओं को आजीवन सुविधाएं नहीं मिलेंगी।

हालांकि, 15 जुलाई से पहले दान करने वाले पुराने दानदाताओं को पहले की तरह आजीवन सुविधाएं मिलती रहेंगी। इसी वजह से नई नीति लागू होने से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दान किया।

नई डोनर पॉलिसी में क्या बदला?

नई नीति के तहत पहले की तरह अलग-अलग राशि के कई दान वर्ग नहीं होंगे। अब दानदाताओं को उनके योगदान के आधार पर चार श्रेणियों में रखा जाएगा। व्यक्तिगत दानदाताओं और संस्थाओं या ट्रस्टों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।

पहले दानदाताओं को आजीवन कई विशेष सुविधाएं मिलती थीं। इनमें विशेष प्रवेश दर्शन, सुपथम प्रवेश, ब्रेक दर्शन, सुप्रभात सेवा में शामिल होने का अवसर, कल्याणोत्सव में भागीदारी, आवास सुविधा और लड्डू, रेशमी वस्त्र, सोने-चांदी के सिक्के जैसे उपहार शामिल थे।

नई व्यवस्था के तहत व्यक्तिगत दानदाताओं को मिलने वाले विशेषाधिकार 20 वर्षों तक और संस्थाओं या ट्रस्टों को 15 वर्षों तक ही मान्य रहेंगे। टीटीडी का कहना है कि इससे आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

दुनिया के सबसे समृद्ध मंदिरों में शामिल है तिरुपति

तिरुपति बालाजी मंदिर दुनिया के सबसे समृद्ध धार्मिक संस्थानों में गिना जाता है। इसकी अनुमानित कुल संपत्ति करीब 3.38 लाख करोड़ रुपये बताई जाती है, जो कई छोटे देशों की जीडीपी से भी अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में मंदिर की हुंडी में 1,738 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा आया। यानी औसतन प्रतिदिन करीब 4.75 करोड़ रुपये का दान मिला। मौजूदा समय में मंदिर के 1,97,888 रजिस्टर्ड दानदाता हैं। इनमें करीब 1.5 लाख लोगों ने 1 लाख रुपये या उससे अधिक का दान किया है, जबकि लगभग 22,000 दानदाताओं का योगदान 10 लाख रुपये से ज्यादा है।

टीटीडी ने क्यों बदली डोनर पॉलिसी?

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड का कहना है कि पिछले कुछ सैलून में बड़े दानदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। केवल 10 लाख रुपये या उससे अधिक दान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले चार महीनों में ही करीब 3,000 बढ़ी है। टीटीडी के अध्यक्ष बी.आर. नायडू के अनुसार, नई नीति का उद्देश्य दान व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और एकरूपता लाना है। साथ ही आम श्रद्धालुओं और दानदाताओं के हितों के बीच बैलेंस बनाना भी इसका मकसद है।

Updated on:
16 Jul 2026 03:45 pm
Published on:
16 Jul 2026 03:44 pm