पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट के तनाव के बीच भारत को एलपीजी संकट से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। भारतीय ध्वज वाले दो बड़े एलपीजी कैरियर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ ने युद्धग्रस्त होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर लिया है। इन जहाजों में कुल 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी लदा […]
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट के तनाव के बीच भारत को एलपीजी संकट से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। भारतीय ध्वज वाले दो बड़े एलपीजी कैरियर 'पाइन गैस' और 'जग वसंत' ने युद्धग्रस्त होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर लिया है। इन जहाजों में कुल 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी लदा है, जो देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने वाली गैस की जरूरत के बराबर है। इनमें कुल 60 भारतीय नाविक सवार हैं-'जग वसंत' पर 33 और 'पाइन गैस' पर 27 नाविक।
आपको बता दें कि वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। इस स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्य सरकारों से कड़े कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग इस संकट का फायदा उठाकर कालाबाजारी या जमाखोरी करेंगे, उनके खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि दोनों जहाज सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ये ईरान के लारक और किश्म द्वीपों के बीच से गुजरे, जहां ईरानी अधिकारियों को पहचान सत्यापित करने के बाद अनुमति मिली। दोनों जहाज अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं और अगले दो दिनों में (26 से 28 मार्च के बीच) गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है। सामान्यतः खाड़ी से भारत तक यात्रा में दो से ढाई दिन लगते हैं।
इससे पहले 'एमटी शिवालिक' और 'एमटी नंदा देवी' नामक दो एलपीजी कैरियर भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंच चुके हैं। इनमें भी करीब 92,712 टन एलपीजी थी। इन चार जहाजों से कुल लगभग 1.85 लाख टन एलपीजी भारत पहुंच चुकी या पहुंच रही है, जो घरेलू उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है।
युद्ध शुरू होने पर होर्मुज स्ट्रेट में 28 भारतीय जहाज फंस गए थे, जिनमें से कुछ निकल चुके हैं। वर्तमान में पश्चिमी हिस्से में 20-22 जहाज बचे हैं, जिनमें 5-6 एलपीजी कैरियर शामिल हैं और करीब 600 नाविक सवार हैं। सरकार ने ईरान के साथ संपर्क बनाए रखा है ताकि जहाजों की सुरक्षित निकासी हो सके। ईरान अमेरिकी संबंध न होने और अन्य जांच के बाद कुछ जहाजों को जाने की अनुमति दे रहा है। नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है—जहाजों पर भोजन और पानी की कोई कमी नहीं है।
भारत अपनी 60% एलपीजी जरूरत आयात करता है, जिसमें 85-95% हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। कृत्रिम कमी और कालाबाजारी की अफवाहों के बीच ये जहाजों की निकासी से घरेलू आपूर्ति में स्थिरता आएगी। सरकार ने पहले ही स्टॉक पर्याप्त होने का दावा किया है और राज्य सरकारों से निगरानी बढ़ाने को कहा है।