यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के पूर्व बिजनेस पार्टनर तिमूर मिंडिच पर 100 मिलियन डॉलर (830 करोड़ रुपये) का घोटाला करने का आरोप है। ऊर्जा क्षेत्र में ठेकेदारों से रिश्वत लेने के मामले में जांच चल रही है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की इस वक्त अपने देश में बुरी तरह से फंस चुके हैं। उनके दोस्त ने मुश्किल की घड़ी में उन्हें धोखा दे दिया है।
जेलेंस्की के दोस्त व यूक्रेन के ऊर्जा मंत्री पर देश में सबसे बड़ा घोटाला करने का आरोप लगा है। जेलेंस्की शासन पर भ्रष्टाचार का आरोप ऐसे समय में लगा है, जब यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध चरम पर है।
जांचकर्ताओं ने जिस मंत्री पर अरबों रुपये गबन करने का आरोप लगाया है, वह जेलेंस्की के बिजनेस पार्टनर भी रह चुके हैं। मंत्री का नाम तिमूर मिंडिच बताया जा रहा है। भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया है।
तिमूर मिंडिच पर 100 मिलियन डॉलर (करीब 830 करोड़ रुपये) की रिश्वतखोरी का आरोप है। यूक्रेन के राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एनएबीयू) ने कहा है कि मिंडिच एक ऐसे ग्रुप का नेतृत्व कर रहे थे, जिसने एक ऊर्जा कंपनी के ठेकेदारों से बिजनेस डील के बदले में लगभग 100 मिलियन डॉलर की रिश्वत और कमीशन प्राप्त किया था।
ब्यूरो के अनुसार, इस समूह ने फर्जी कंपनियों के माध्यम से लाखों डॉलर कE धनशोधन किया। हालांकि, मिंडिच औपचारिक रूप से आरोपित होने से पहले ही यूक्रेन से भाग गए।
जेलेंस्की ने शुरू में इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन जैसे-जैसे जनता का दबाव बढ़ता गया, राष्ट्रपति को अपने दोस्त पर एक्शन लेना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषक वोलोडिमिर फेसेंको ने कहा- लगभग हर यूक्रेनी राष्ट्रपति के लिए अंदरूनी घेरे हमेशा एक समस्या रहे हैं।
उन्होंने कहा- जेलेंस्की के लिए, ये दोस्त हैं। ऐसे लोग जिन्हें वह जानते थे और जिन पर भरोसा करते थे। लेकिन जिंदगी ने उन्हें कई बार सजा दी है, खासकर अब मिंडिच के मामले में, जिससे पता चलता है कि दोस्तों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना बुरा अंजाम दे सकता है।
उधर, रूस ने इस मामले को लेकर यूक्रेन को घेरा है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बुधवार को कहा कि जिन देशों ने हाल के दिनों में यूक्रेन की आर्थिक मदद की है, वह जेलेस्की की गतिविधियों को देख रहे हैं। अब उन्हें दुनिया को भ्रष्टाचार के सवालों पर जवाब देना होगा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा- दूसरे देश यह भी देख रहे हैं कि जो भी पैसा वह टैक्स पेयर्स से लेकर यूक्रेन को देते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा कीव सरकार द्वारा हजम कर लिया जाता है।