Unified Pension Scheme : इसमें कर्मचारियों को राशि नहीं देनी होगी। सरकार स्वयं 18 फीसदी भुगतान करेगी। नई पेंशन स्कीम इसके विपरीत है। उसमें कर्मचारियों को अपने मूल वेतन का 10 फीसदी भुगतान करना होता है।
Unified Pension Scheme : मोदी सरकार ने कर्मचारियों के लिए नई पेंशन स्कीम पेश की है। इसके तहत 25 साल तक नौकरी करने वालों को मूल वेतन का 50 फीसदी पेंशन के रूप में मिलेगा। इसके अलावा अगर कोई सिर्फ 10 साल तक ही कार्यरत रहता है तो उसे 10 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन के रूप में भुगतान किया जाएगा। सरकार ने इसे Unified Pension Scheme (UPS) नाम दिया है।
अब कर्मचारियों को सरकार की नई पेंशन स्कीम (NPS) और एकीकृत पेंशन योजना (UPS) में से एक को चुनना होगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी घोषणा करते हुए बताया है कि 'UPS को एक अप्रैल 2025 से लागू किया जाएगा। इससे 23 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ होगा।
सबसे खास बात यह है कि इसमें कर्मचारियों को राशि नहीं देनी होगी। सरकार स्वयं 18 फीसदी भुगतान करेगी। नई पेंशन स्कीम इसके विपरीत है। उसमें कर्मचारियों को अपने मूल वेतन का 10 फीसदी भुगतान करना होता है। इसके बाद केंद्र सरकार 14 फीसदी अपना अंशदान देती है। तब जाकर पेंशन बनती है।
जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले यह स्कीम भारतीय जनता पार्टी के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकती है। वैसे भी हरियाणा की आदत यही रही है कि जिसकी दिल्ली में सरकार वही हरियाणा का भी लंबरदार। अबकी बार क्या होगा इसका फैसला तो 4 अक्टूबर को होगा लेकिन इससे पहले जीत की जमीन तैयार करने के लिए भाजपा ने एक कदम आगे बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि इसे लागू करने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर केंद्रीय कर्मचारी नेताओं के साथ बैठक की थी।
मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एनपीएस के विकल्प के तौर पर नई पेंशन योजना (यूपीएस) लाकर चार राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले विरो धियों से एक और मुद्दा छीनने का दांव खेला है। पिछले सप्ताह ही सरकार ने संयुक्त सचिव एवं निदेशक पदों पर बिना आरक्षण के लेटरल भर्ती को भी विपक्ष के विरोध के बाद रद्द कर दिया था।
पिछले कुछ सालों से सरकारी कर्मचारियों के लिए एनपीएस को नुकसानदायक बता कर विपक्ष ने चुनावी मुद्दा बना रखा था। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा तथा उसके बाद महाराष्ट्र व झारखंड विधानसभा के चुनाव में विपक्ष फिर से एनपीएस की जगह पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करने का वादा कर सकता था जिससे भाजपा को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता था। एनपीएस में सुधार के साथ यूपीएस लाने से विपक्ष के हाथ से मुद्दा छिन सकता है।
माना जाता है कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा के विधानसभा चुनाव हार कर सरकार गंवाने का प्रमुख कारण कांग्रेस की ओपीएस लागू करने की घोषणा थी।भाजपा शासित राज्य लागू कर सकते हैं नई योजना केंद्र सरकार के यूपीएस लाने के फैसले के बाद भाजपा शासित राज्यों में भी इसे लागू किया जा सकता है। पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ओपीएस को मुद्दा बनाया था तो प्रदेश के भाजपा नेता भी अंदरखाने स्वीकार कर रहे थे कि इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है। हालांकि वहां भाजपा चुनाव जीत गई।
नई यूपीएस और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस)में मासिक कटौती के अलावा अब सेवानिवृत्ति लाभों का ज्यादा फर्क नहीं रह गया है। ओपीएस में कर्मचारी के वेतन से पेंशन के लिए कोई कटौती नहीं होती थी जबकि एनपीएस की तरह नई यूपीएस में भी मासिक वेतन से 10 फीसदी कटौती का प्रावधान है।