Urban Heat Island: एक वैश्विक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि पेड़ शहरों का तापमान कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन अमीर शहरों को इसका ज्यादा फायदा मिल रहा है।
Urban Heat Island effect:दुनिया भर में बढ़ती शहरी गर्मी और ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव के बीच पेड़ अब सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि शहरों के लिए प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम बनते जा रहे हैं। एक वैश्विक अध्ययन में 9,000 बड़े शहरों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि पेड़ औसतन 0.15 डिग्री सेल्सियस तक शहरी तापमान कम करते हैं। यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि पेड़ों के बिना कई शहर आज की तुलना में दोगुने अधिक गर्म होंगे।
अध्ययन ने एक बड़ी असमानता भी उजागर की है। धनी देशों के लगभग 40% शहरों को पेड़ों की वजह से 17 डिग्री सेल्सियस तक की स्थानीय शीतलता मिलती है, जबकि कम आय वाले देशों के 9% से भी कम शहरों को ऐसी राहत मिल पाती है क्योंकि इन देशों के शहरों में हरित क्षेत्र घट रहे हैं, जबकि कंक्रीट और डामर का विस्तार लगातार बढ़ रहा है।
भारत जैसे निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए यह संकट और गंभीर है। घनी आबादी वाले शहर पहले से ही अत्यधिक गर्मी का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार निम्न आय वाले देशों की बड़ी शहरी आबादी शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में रहती है, जहां पेड़ सबसे कम हैं और उनकी जरूरत सबसे ज्यादा है।
अध्ययन की सबसे सकारात्मक बात यह रही कि शुष्क शहरों में पेड़ों की 'कूलिंग एफिशिएंसी' सबसे अधिक पाई गई। यानी गर्म और सूखे इलाकों में लगाया गया एक पेड़ अपेक्षाकृत ठंडे या नम शहरों की तुलना में ज्यादा तापमान कम कर सकता है। पेड़ छाया देने के साथ वाष्पोत्सर्जन से हवा को ठंडा करते हैं, जिससे कंक्रीट से पैदा होने वाली गर्मी का असर घटता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि वृक्षारोपण बेहद जरूरी है, लेकिन यह अकेले जलवायु परिवर्तन का समाधान नहीं हो सकता। अधिकतम हरियाली बढ़ाने के बाद भी भविष्य की शहरी गर्मी में केवल लगभग 20% तक कमी आने का अनुमान है। पेड़ों के साथ बेहतर शहरी योजना, कम कार्बन उत्सर्जन और टिकाऊ निर्माण मॉडल भी जरूरी हैं।