
अरविंद केजरीवाल(फोटो-IANS)
AAP: दिल्ली हाई कोर्ट से अरविंद केजरीवाल और कई आप नेताओं के लिए अहम खबर सामने आई है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने आम आदमी पार्टी के छह बड़े नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। इस लिस्ट में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा, दुर्गेश पाठक और सौरभ भारद्वाज का नाम शामिल है।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि इन नेताओं ने कानूनी रास्ता अपनाने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए अदालत और जज की छवि खराब करने की कोशिश की। कोर्ट के मुताबिक, अगर किसी आदेश से असहमति थी तो उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती थी, लेकिन इसके बजाय वीडियो, पोस्ट और लेटर के जरिए ऐसा माहौल बनाया गया जिससे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हों। सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ एक सोची-समझी मुहीम चलाई गई। अदालत ने माना कि यह मामला किसी एक जज की निजी आलोचना का नहीं बल्कि एक संवैधानिक संस्था को दबाव में लेने की कोशिश का है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं दिखाई गई तो आगे चलकर न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
कोर्ट ने खास तौर पर अरविंद केजरीवाल की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि कोर्ट राजनीतिक प्रभाव में काम कर रही है। जस्टिस शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर कोई नेता पूरे देश के नागरिकों की ओर से यह कैसे कह सकता है कि अदालत से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट के मुताबिक, इस तरह के बयान सीधे तौर पर न्यायपालिका की गरिमा पर हमला हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अगर कोई पक्ष किसी जज से असहमत हो और फिर सार्वजनिक अभियान चलाकर अदालत की छवि खराब करने लगे, तो यह बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे यह संदेश जाएगा कि यदि कोई जज किसी राजनीतिक व्यक्ति की उम्मीदों के मुताबिक फैसला नहीं देता, तो उसके खिलाफ सोशल मीडिया ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा।
सुनवाई में संजय सिंह का भी जिक्र हुआ। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने कथित तौर पर ऐसे वीडियो और पोस्ट शेयर किए जिनमें यह दिखाने की कोशिश की गई कि अदालत किसी खास विचारधारा से प्रभावित है। अदालत ने माना कि इस तरह की बातें न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की कोशिश हैं और यह आपराधिक अवमानना के दायरे में आती हैं। वहीं सौरभ भरद्वाज की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी अदालत ने सख्त टिप्पणी की। कोर्ट के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में हाई कोर्ट के जज और बीजेपी के रिश्तों को लेकर सार्वजनिक सवाल उठाए गए। अदालत ने कहा कि किसी मौजूदा जज को किसी राजनीतिक दल से जोड़ना सामान्य आलोचना नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है।
Published on:
14 May 2026 10:05 pm
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