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‘छात्रों के जूते-कपड़े के लिए कड़े नियम, खुद पेपर तक नहीं बचा सकते’, उद्धव सेना का सरकार पर तंज

NEET-UG 2026 Paper Leak: शिवसेना (UBT) ने परीक्षा केंद्रों पर लागू होने वाले कड़े नियमों पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार छात्रों से जूते उतरवाती है, उनके कपड़ों और यहां तक कि पानी की बोतलों तक की जांच करती है, लेकिन खुद पेपर को सुरक्षित रखने में नाकाम है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

May 14, 2026

Uddhav Thackeray on PM Modi

उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार पर साधा निशाना (Photo: IANS)

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) 2026 पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि ‘ब्रेकिंग’ और ‘लीकिंग’ मौजूदा भाजपा सरकार का मूलमंत्र बन गया है। पार्टी ने कहा कि सरकार अब बड़ी परीक्षाएं भी बिना घोटाले और पेपर लीक के आयोजित नहीं कर पा रही है।

शिवसेना (यूबीटी) ने सवाल उठाया कि 22 लाख से अधिक छात्रों द्वारा दी गई नीट परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करना आखिर ईमानदार छात्रों और उनके परिवारों के साथ अन्याय नहीं तो और क्या है।

‘ईमानदार छात्रों को क्यों भुगतना पड़ रहा?’

‘सामना’ में प्रकाशित लेख में कहा गया कि जिन छात्रों का पेपर खरीद-फरोख्त से कोई लेना-देना नहीं था, उन्हें दोबारा परीक्षा देने की सजा क्यों भुगतनी पड़ रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) इस सवाल का जवाब देने से बच रहे हैं कि आखिर नीट का पेपर लीक कैसे हुआ।

लेख में कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लाखों छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए सैकड़ों किमी का सफर करना पड़ता है। यात्रा, रहने और तैयारी में भारी खर्च और मानसिक दबाव झेलने के बाद अब उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी। इससे छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक व मानसिक बोझ पड़ा है।

‘पेपर खुलेआम बिक रहा था, प्रश्न क्यों नहीं बदला’

शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही लाखों रुपये में खुलेआम बेचा गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि दलालों और बिचौलियों के जरिए देशभर में संपन्न परिवारों तक पेपर पहुंचाया गया।

संपादकीय में कहा गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सऐप ग्रुप पर ‘गेस पेपर’ के नाम पर नीट का असली प्रश्नपत्र खुलेआम घूम रहा था। इसके बावजूद एनटीए और सरकारी एजेंसियां समय रहते कार्रवाई नहीं कर सकीं।

उद्धव सेना ने आरोप लगाते हुए कहा, जब नीट पेपर लीक होने की भनक परीक्षा के कई दिन पहले ही लग गई थी तो पेपर क्यों नहीं बदला गया, ऐसा किया गया होता तो लीक करने वाले और उसे खरीदने वाले, दोनों को करारा झटका लगता। लेकिन एनटीए ने ऐसा नहीं किया और नीट परीक्षा आयोजित करवा दी। क्या इसके पीछे कोई अलग योजना थी?

कोचिंग क्लासेस और सिस्टम पर गंभीर आरोप

सामना के लेख में कुछ निजी कोचिंग संस्थानों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि कई कोचिंग क्लासेस टॉपर बनाने के नाम पर शिक्षा का बाजार चला रहे हैं और इसी वजह से पेपर लीक रैकेट को बढ़ावा मिल रहा है। वह ऐसा हर साल अपने ग्राहक बढ़ाने के लिए करते हैं।

पार्टी ने आरोप लगाया कि एनटीए के भीतर मौजूद कुछ भ्रष्ट अधिकारी, कोचिंग क्लास संचालक और सिस्टम से जुड़े लोग मिलकर इस पूरे खेल को चला रहे हैं। संपादकीय में दावा किया गया कि पेपर लीक का नेटवर्क महाराष्ट्र से लेकर बिहार, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, केरल और जम्मू-कश्मीर तक फैला हुआ है।

‘हर साल पेपर लीक, तमाशा बना दिया है’

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि 2017, 2021, 2024 और अब 2026 में भी नीट पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। पार्टी ने सवाल किया कि बार-बार एक ही तरह की घटनाएं होने के बावजूद सरकार स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाल पा रही है।

संपादकीय में कहा गया कि परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए कपड़े, जूते, घड़ी और पानी की बोतल तक को लेकर सख्त नियम बनाए जाते हैं, लेकिन परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में सरकार लगातार विफल हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सचमुच इस परीक्षा को एक तमाशा बना दिया है।