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बिजली संकट की आहट? जलविद्युत उत्पादन घटा, 95 ताप बिजलीघरों में कोयले की कमी

कमजोर मानसून से सितंबर में जलविद्युत उत्पादन 20% घटा, जबकि कोयला आधारित उत्पादन बढ़ा है। देश के 95 ताप बिजलीघरों में कोयला भंडार क्रिटिकल स्तर पर पहुंच गया है।
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Updated: 27 Oct 2026, 2:00 AM IST
Electricity news
AI Image-(ChatGpt)

Central Electricity Authority: कमजोर मानसून का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखने लगा है। जलाशयों में पानी घटने से सितंबर में जलविद्युत उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी गिर गया। इसकी भरपाई के लिए कोयला आधारित बिजली उत्पादन 13.3 फीसदी बढ़ाना पड़ा। सर्दियों में बिजली की मांग के बीच जलविद्युत की घटती उपलब्धता से ताप बिजलीघरों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। सितंबर में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे हो गया, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे अधिक है।

दक्षिण के जलाशयों की स्थिति सबसे खराब

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 22 अक्टूबर तक देश के 178 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण सामान्य स्तर का 81.57 फीसदी रह गया। दक्षिणी क्षेत्र में यह सामान्य का महज 42.34 फीसदी है। उत्तरी क्षेत्र, जिसमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं, में 58.14 फीसदी पानी बचा है। पश्चिमी क्षेत्र में 79.10 फीसदी, पूर्वी क्षेत्र में 76.10 फीसदी और मध्य क्षेत्र में 83.77 फीसदी जल भंडारण दर्ज किया गया।

अलनीनो से बढ़ सकती है चुनौती


इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले दशक के सबसे कमजोर मानसूनों में रहा। बारिश की कमी से जलाशयों में पानी की आवक घटी है। बिजली मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में जलविद्युत उत्पादन अनुमान से करीब 12 फीसदी कम रहा। मौसम विशेषज्ञों ने अक्टूबर-दिसंबर के दौरान अलनीनो विकसित होने की 83 फीसदी संभावना जताई है। इसके फरवरी 2027 तक बने रहने का अनुमान है। ऐसे में बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता और बढ़ सकती है।

देश में स्थापित ऊर्जा क्षमता में विभिन्न स्रोतों की हिस्सेदारी

क्रम संख्याऊर्जा स्रोतहिस्सेदारी (%)
1तापीय ऊर्जा45.05%
2सौर ऊर्जा30.52%
3पवन ऊर्जा10.56%
4जलविद्युत9.26%
5बायो पावर2.10%
6परमाणु ऊर्जा1.57%
7लघु जलविद्युत0.92%
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