
Central Electricity Authority: कमजोर मानसून का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखने लगा है। जलाशयों में पानी घटने से सितंबर में जलविद्युत उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी गिर गया। इसकी भरपाई के लिए कोयला आधारित बिजली उत्पादन 13.3 फीसदी बढ़ाना पड़ा। सर्दियों में बिजली की मांग के बीच जलविद्युत की घटती उपलब्धता से ताप बिजलीघरों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। सितंबर में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे हो गया, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे अधिक है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 22 अक्टूबर तक देश के 178 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण सामान्य स्तर का 81.57 फीसदी रह गया। दक्षिणी क्षेत्र में यह सामान्य का महज 42.34 फीसदी है। उत्तरी क्षेत्र, जिसमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं, में 58.14 फीसदी पानी बचा है। पश्चिमी क्षेत्र में 79.10 फीसदी, पूर्वी क्षेत्र में 76.10 फीसदी और मध्य क्षेत्र में 83.77 फीसदी जल भंडारण दर्ज किया गया।
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले दशक के सबसे कमजोर मानसूनों में रहा। बारिश की कमी से जलाशयों में पानी की आवक घटी है। बिजली मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में जलविद्युत उत्पादन अनुमान से करीब 12 फीसदी कम रहा। मौसम विशेषज्ञों ने अक्टूबर-दिसंबर के दौरान अलनीनो विकसित होने की 83 फीसदी संभावना जताई है। इसके फरवरी 2027 तक बने रहने का अनुमान है। ऐसे में बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता और बढ़ सकती है।
| क्रम संख्या | ऊर्जा स्रोत | हिस्सेदारी (%) |
|---|---|---|
| 1 | तापीय ऊर्जा | 45.05% |
| 2 | सौर ऊर्जा | 30.52% |
| 3 | पवन ऊर्जा | 10.56% |
| 4 | जलविद्युत | 9.26% |
| 5 | बायो पावर | 2.10% |
| 6 | परमाणु ऊर्जा | 1.57% |
| 7 | लघु जलविद्युत | 0.92% |