राष्ट्रीय

रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 30.30 मिलियन टन तय, इतने मिलियन टन चावल की होगी खरीद

केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए केंद्रीय पूल में 30.30 मिलियन टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया है। खाद्य मंत्रालय की बैठक में खरीद, भंडारण और वितरण पर चर्चा हुई। साथ ही चावल और मिलेट्स की खरीद तथा बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की सप्लाई के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया।

2 min read
Mar 08, 2026
Wheat procurement target 2026-27 Set(AI Image-ChatGpt)

Wheat procurement target: केंद्र सरकार ने आगामी रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए केंद्रीय पूल में 30.30 मिलियन टन (एमटी) गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य लगभग पिछले वर्ष के बराबर है। रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 में सरकार ने 30.03 मिलियन टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा था, जिसमें लगभग 26 लाख किसानों से खरीद की गई थी। इस संबंध में हाल ही में खाद्य मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी रबी सीजन की तैयारियों की समीक्षा करना और खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाना था।

Wheat procurement target: एमएसपी पर पारदर्शी तरीके से खरीद सुनिश्चित करने की कवायद


बैठक के दौरान गेहूं के अलावा अन्य खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण और वितरण व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार चाहती है कि किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुचारू और पारदर्शी तरीके से खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

इतने मिलियन टन चावल की खरीद का लक्ष्य


खाद्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि रबी सीजन 2025-26 के लिए 7.6 मिलियन टन चावल की खरीद का लक्ष्य भी तय किया गया है। इसके साथ ही राज्यों के माध्यम से किसानों से सीधे 0.77 मिलियन टन मिलेट्स यानी मोटे अनाज की खरीद की योजना बनाई गई है। सरकार लगातार मोटे अनाज के उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, क्योंकि इन्हें पोषण के लिहाज से काफी फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा मंत्रालय ने एक नया पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। इस परियोजना के तहत पांच राज्यों में 10 प्रतिशत तक टूटे दानों वाला बेहतर गुणवत्ता का चावल सप्लाई किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह देखना है कि इस तरह के चावल की सप्लाई और वितरण व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है।

Published on:
08 Mar 2026 05:14 am
Also Read
View All

अगली खबर