
Who is Nandan Nilekani: देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए उच्चस्तरीय समिति की कमान देश के जाने-माने उद्योगपति और तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि को सौंपी है। आधार व्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले नंदन नीलेकणि अब देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सरकार को सुझाव देंगे। आइए जानते हैं कि नंदन नीलेकणि कौन हैं और उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई है।
नंदन नीलेकणि देश की अग्रणी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस के को-फाउंडर और अध्यक्ष हैं। साल 1981 में उन्होंने एन. आर. नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर इस कंपनी की स्थापना की थी। पिछले चार दशकों में उन्होंने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तकनीक और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में उनके अनुभव को दुनिया भर में सराहा जाता है।
साल 2009 से 2014 तक नंदन नीलेकणि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के संस्थापक अध्यक्ष रहे। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। इस दौरान उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्राप्त था। उनके नेतृत्व में आधार कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसके माध्यम से देश के करोड़ों नागरिकों को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान मिली। आज आधार दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणालियों में से एक है और सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं तथा डिजिटल लेनदेन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
नंदन नीलेकणि एकस्टेप फाउंडेशन के को-फाउंडर और अध्यक्ष भी हैं। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है जो तकनीक की मदद से बच्चों में बुनियादी साक्षरता और गणितीय क्षमता विकसित करने के लिए काम करती है। जनवरी 2023 में उन्हें जी-20 के डिजिटल व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञ समूह का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
नंदन नीलेकणि का जन्म बेंगलुरु में हुआ। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे से स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि तकनीक और नवाचार में रही, जिसने आगे चलकर उन्हें देश के सबसे प्रभावशाली तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल कर दिया।
नंदन नीलेकणि ने साल 2014 में कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें भाजपा के उम्मीदवार अनंत कुमार से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। बाद में एक साक्षात्कार में उन्होंने चुनाव लड़ने के फैसले को अपने जीवन की बड़ी गलतियों में से एक बताया था।
तकनीक, नवाचार और डिजिटल क्षेत्र में योगदान के लिए नंदन नीलेकणि को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। साल 2006 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। साल 2005 में उन्हें जोसेफ शुम्पीटर पुरस्कार मिला। फोर्ब्स एशिया ने उन्हें बिजनेसमैन ऑफ द ईयर चुना। टाइम पत्रिका ने उन्हें दो बार दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया। फॉरेन पॉलिसी ने उन्हें टॉप 100 ग्लोबल थिंकर्स में जगह दी। इसके अलावा उन्हें द इकोनॉमिस्ट सामाजिक एवं आर्थिक नवाचार पुरस्कार, ईवाई लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार, निक्केई एशिया पुरस्कार और बिजनेस स्टैंडर्ड लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2024 में टाइम पत्रिका ने उन्हें एआई के क्षेत्र के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में भी शामिल किया।
नंदन नीलेकणि लेखक भी हैं। उन्होंने कई चर्चित किताबें लिखी हैं। इनमें इमैजिनिंग इंडिया, रीबूटिंग इंडिया: रियलाइजिंग अ बिलियन एस्पिरेशन्स और द आर्ट ऑफ बिटफुलनेस: कीपिंग कैल्म इन द डिजिटल वर्ल्ड शामिल हैं। इन किताबों में उन्होंने भारत के डिजिटल भविष्य और तकनीक को लेकर अपने विचार रखे हैं।
आधार के अलावा नंदन नीलेकणि भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को मजबूत बनाने वाली कई पहलों से जुड़े रहे हैं। डिजिटल भुगतान प्रणाली और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) जैसी पहलों को आगे बढ़ाने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। तकनीक आधारित सार्वजनिक प्रणालियों के विकास में उनके लंबे अनुभव ने उन्हें देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल किया है।
नीट यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीकी विशेषज्ञ और आधार व्यवस्था को लागू करने में अहम भूमिका निभा चुके नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। नीलेकणि को बड़े स्तर पर डिजिटल व्यवस्था विकसित करने का लंबा अनुभव है। आधार व्यवस्था के निर्माण और डिजिटल क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें इस समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
समिति में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व खुफिया ब्यूरो प्रमुख तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और प्रशासनिक विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा भी शामिल हैं। यह समिति परीक्षा कराने की पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेगी। साथ ही परीक्षा की सुरक्षा, संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार को अपनी सिफारिशें देगी।