पटना के सियासी गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि क्या सीएम नीतीश कुमार हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार राज्यसभा का टिकट थमाएंगे कि नहीं...
Rajya Sabha Election: 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। चुनाव आयोग 26 फरवरी को अधिसूचना जारी करेगा। नामांकन की तारीख 5 मार्च है, 6 मार्च को नामांकन जांच होगा। 9 मार्च को नाम वापसी की तारीख है। 16 मार्च को वोटिंग होगी और इसी दिन नतीजे भी आएंगे। महाराष्ट्र की 7 सीटों पर, तमिनलाडु की 6 सीटों पर, ओडिशा की 4, पश्चिम बंगाल की 5, बिहार की 5, असम की 3, छत्तीसगढ़, हिमाचल और तेलंगाना की 2-2-2 सीटों व हिमाचल की 1 सीटों पर चुनाव होना है।
चुनाव की घोषणा के बाद बाद बिहार में सियासी हलचल तेज है। संख्या बल के अनुसार, राज्यसभा की 5 में 4 सीटों NDA की खातें में आ गई हैं। बीजेपी से 2 और जदयू से 2 नेताओं का राज्यसभा जाना पक्का माना जा रहा है। जदयू की तरफ से पहला नाम रामनाथ ठाकुर का है, लेकिन दूसरे नाम पर कयासों का दौर जारी है। इस बात पर सबकी निगाह इस पर है कि क्या राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हशिवंश नारायण सिंह को पार्टी फिर से प्रत्याशी बनाएगी।
जदयू नेताओं में राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जबकि RJD नेता प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह और RLM चीफ उपेंद्र कुशवाहा का टर्म भी 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। जदयू की तरफ से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का फिर से राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। सियासी जानकारों का कहना है कि रामनाथ ठाकुर पूर्व सीएम व भारत रत्न कपूर्री ठाकुर के बेटे हैं। साथ ही, रामनाथ EBC समुदाय से भी आते हैं। EBC समुदाय नीतीश कुमार का पक्का वोट बैंक माना जाता है। लिहाजा, उनका फिर से राज्यसभा जाना तय है।
वहीं, नीतीश कुमार की पार्टी की तरफ से अभी तक सिर्फ तीन (महेंद्र प्रसाद ऊर्फ किंग महेंद्र, शरद यादव व वशिष्ठ नारायारण सिंह) ऐसे शख्स हैं, जिन्हें दो बार से अधिक उच्च सदन भेजा गया है।
पत्रकार रहे हरिवंश नारायण सिंह साल 2014 जदयू की टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे। अगस्त 2018 से वह ऊपरी सदन के डिप्टी चेयरमैन हैं। संसदीय कार्यवाही के दौरान संतुलित व संंयमित रवैये के चलते वह पक्ष व विपक्ष के साथ आसानी से तालमेल बैठा लेते हैं, लेकिन साल 2022 में जब जदयू ने NDA से नाता तोड़ा और महागठबंधन में शामिल हुई, तब पार्टी के नेताओं की अपेक्षा थी कि हरिवंश उपसभापति पद से त्यागपत्र दे दें, लेकिन उन्होंने इसे संवैधानिक मर्यादा और संसदीय परंपरा का विषय बताकर पद पर बने रहना उचित समझा। उनका यह निर्णय सीएम नीतीश व जदयू को असहज कर गया। यह भी एक बड़ी वजह है कि उनके नाम पर पार्टी के भीतर सहमति नहीं बनती दिख रही है।
सीनियर पत्रकार अरूण कुमार पांडेय का कहना है कि बिहार की पांच राज्यसभा सीटों में से चार पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इन चार सीटों में दो (जदयू) और दो भाजपा के खाते में जा सकती हैं। जदयू ने अपनी दो सीटों में से एक पर रामनाथ ठाकुर के नाम पर लगभग सहमति बना ली है। पार्टी के भीतर उनके नाम पर व्यापक सहमति बताई जा रही है। हालांकि दूसरी सीट पर हरिवंश नारायम सिंह की जगह मनीष वर्षा को राज्यसभा भेजने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, हरिवंश सिंह के नाम पर पार्टी में एकमत राय नहीं बन पा रही है।
वहीं, सीनियर पत्रकार प्रवीण बागी का दावा है कि जदयू फिलहाल अपनी दोनों राज्यसभा सीटों पर किसी बदलाव के मूड में नहीं दिख रही है। उनका कहना है कि रामनाथ ठाकुर, जो कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं, सामाजिक और जातीय समीकरण के लिहाज से पार्टी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं। इसलिए उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना प्रबल है।
हरिवंश सिंह को लेकर प्रवीण बागी का कहना है कि वे दिल्ली में भाजपा और जदयू के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। साथ ही, वे एक प्रबुद्ध और अनुभवी चेहरा माने जाते हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें एक और कार्यकाल देगी।
दूसरे नॉमिनी के रूप में सीएम नीतीश के करीबी व पूर्व नौकरशाह और जदयू के वर्तमान नेशनल जनरल सेक्रेटरी मनीष वर्मा का नाम चल रहा है। माना जाता है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी की रणनीति तैयार करने में मनीष वर्मा का अहम रोल रहा था। इसका फायदा भी पार्टी को मिला।