श्रीनगर में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई है। अपने ही बेटे के हाथों मां पर जानलेवा हमला हुआ है। पुलिस ने आरोपी बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और घायल महिला का इलाज चल रहा है। यह घटना बढ़ते नशे के दुष्प्रभाव और घरेलू हिंसा की गंभीरता को उजागर करती है।
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर जिले में गुरुवार को एक महिला ने अपने बेटे पर हत्या की कोशिश का आरोप लगाया है। महिला की शिकायत सुनने के बाद सभी अधिकारी सन्न रह गए।
पुलिस ने महिला की शिकायत सुनकर तुरंत उसके बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। अधिकारियों के हवाले से आईएएनएस की रिपोर्ट में बताया गया है कि बेटे ने अपनी मां को जान से मारने के इरादे से हमला कर दिया। जिसमें वह घायल हो गई है।
महिला पर हिंसक हमले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि 52 वर्षीय एक गृहिणी ने श्रीनगर के बटमालू पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
महिला के बेटे की पहचान 22 वर्षीय अदनान के रूप में हुई है। जो न्यू कॉलोनी बेमिना का निवासी है। शिकायतकर्ता के अनुसार, अदनान रोज नशे करता है और उसने अपनी मां की हत्या करने के इरादे से उनपर हमला किया।
अब अदनान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 और रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया है। घायल महिला को बेमिना स्थित झेलम वैली मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
डॉक्टर महिला की हालत पर नजर रख रहे हैं। पुलिस ने कहा कि यह मामला युवाओं में बढ़ती नशीली दवाओं की लत के चिंताजनक पैटर्न को दर्शाता है, जिसके कारण कई मामलों में घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद हुए हैं।
हाल के महीनों में, श्रीनगर पुलिस ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि कैसे मादक द्रव्यों का सेवन आपराधिक व्यवहार को बढ़ावा दे रहा है और पारिवारिक सौहार्द को अस्थिर कर रहा है।
पुलिस ने पुष्टि की है कि जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। प्रारंभिक साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस श्रीनगर शहर में एक नशा मुक्ति केंद्र चलाती है, जहां माता-पिता और परिवारों द्वारा लाए गए मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाता है।
नशीली दवाओं के दुरुपयोग के और अधिक पीड़ितों को आगे आने और समाज के सामान्य सदस्यों के रूप में पुनर्वासित होने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु रोगियों और उनके माता-पिता की पहचान गुप्त रखी जाती है।