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BRICS Summit 2026: 7 साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग! मोदी से मुलाकात में गलवान के बाद रिश्तों की नई परीक्षा

Xi Jinping Modi Meeting: गलवान के बाद बदले रिश्तों में अब संवाद की खिड़की फिर खुलती दिख रही है। BRICS के मंच पर सीमा से आगे बढ़कर कारोबार, निवेश और AI सहयोग की परीक्षा होगी।
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Updated: 10 Sep 2026, 11:25 AM IST
Xi Jinping India Visit 2026
Xi Jinping India Visit 2026: BRICS में मोदी-शी की मुलाकात से खुलेगा नया रास्ता? व्यापार से AI तक कई मुद्दों पर नजर (फोटो सोर्स:X@MEAIndia)

Xi Jinping India Visit 2026: नई दिल्ली में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन इस बार सिर्फ वैश्विक दक्षिण की राजनीति और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहने वाला है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे ने इसकी अहमियत कई गुना बढ़ा दी है। करीब सात साल बाद भारतीय धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी की संभावित द्विपक्षीय मुलाकात के बीच असली सवाल यह है कि क्या दोनों देश सीमा पर तनाव कम होने के बाद रिश्तों को व्यापार, निवेश और तकनीक के अगले पड़ाव तक ले जा पाएंगे।

Xi Jinping India Visit 2026: सात साल बाद दिल्ली में आमने-सामने होंगे मोदी-शी?

Reuters के X के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में पहुंचने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी के मुताबिक, बीजिंग स्थित चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से उनके भारत दौरे की औपचारिक घोषणा की उम्मीद है। संभावित कार्यक्रम के अनुसार शी शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंच सकते हैं और शाम करीब छह बजे भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात संभव है।

अगर यह बैठक होती है तो इसका कूटनीतिक महत्व बेहद बड़ा होगा। वर्ष 2019 के बाद शी की यह पहली भारत यात्रा होगी और गलवान घाटी की 2020 की हिंसक झड़प के बाद दोनों नेताओं की भारतीय जमीन पर पहली संभावित द्विपक्षीय बैठक भी होगी।

गलवान के बाद पहली बार रिश्तों को नई दिशा की कसौटी

जून 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान में हुई झड़प ने भारत-चीन संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया था। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारी सैन्य जमावड़ा हुआ और इसके बाद नई दिल्ली ने साफ कर दिया कि सीमा पर शांति के बिना द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य गति देना आसान नहीं होगा।

हालांकि अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक क्षेत्र में गश्त को लेकर बनी सहमति ने तनाव घटाने की दिशा में रास्ता खोला। इसके बाद कजान में BRICS सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की मुलाकात हुई। अब दिल्ली में संभावित बैठक यह संकेत दे सकती है कि दोनों देश टकराव रोकने के लिए बनाए गए संवाद तंत्र को आर्थिक रिश्तों तक विस्तार देने के लिए तैयार हैं।

व्यापार और निवेश पर भी होगी असली परीक्षा

भारत और चीन के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आर्थिक निर्भरता खत्म नहीं हुई है। भारतीय उद्योगों में चीन से आने वाली मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, औद्योगिक उपकरण और कई अहम कच्चे माल का इस्तेमाल होता है। दूसरी ओर, भारत ने 2020 के बाद चीनी निवेश और संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों में कंपनियों की भूमिका पर कड़ी निगरानी बढ़ाई है।

BRICS के दौरान भारत निवेश संबंधी बाधाओं, कस्टम्स प्रक्रियाओं और हाई-टेक उत्पादों की उपलब्धता जैसे मुद्दे उठा सकता है। दुर्लभ-पृथ्वी चुंबकों जैसी जरूरी औद्योगिक सामग्रियों की आपूर्ति में आई अड़चनें भारतीय ऑटो उद्योग समेत कई क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय बनी हैं।

BRICS भी बदल चुका है

जिस BRIC अवधारणा को अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने 2001 में चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं ब्राजील, रूस, भारत और चीन के लिए इस्तेमाल किया था, वह अब काफी बड़ा मंच बन चुका है। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद BRICS बना और 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने। इंडोनेशिया 2025 में पूर्ण सदस्य बना। आज यह समूह 11 देशों का मंच है, जो दुनिया की करीब आधी आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है।

Updated on:
10 Sep 2026, 11:25 AM IST
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