Year Ender 2024: यह साल हर मायने में खास रहा और सियासी दृष्टिकोण से भी 2024 एक यादगार साल साबित हुआ। लोकसभा चुनाव से लेकर विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों ने हर किसी को चौंका दिया।
Year Ender 2024: साल 2024 ने भारतीय राजनीति में अप्रत्याशित घटनाओं और नतीजों के लिए खुद को इतिहास में दर्ज कर लिया। यह साल कई मायनों में यादगार रहा—लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनावों तक, हर मोर्चे पर परिणामों ने राजनीतिक विश्लेषकों और दलों को चौंका दिया। जनता के फैसलों ने साबित कर दिया कि भारतीय लोकतंत्र में हर चुनाव एक नई कहानी लिखता है।
इस साल के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने "400 पार" का नारा दिया था, लेकिन नतीजे इससे कोसों दूर रहे। भाजपा ने महज 240 सीटों पर जीत दर्ज की और बहुमत से पीछे रह गई। हालांकि, टीडीपी, जदयू, और अन्य सहयोगियों की मदद से भाजपा ने तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाई।
उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य में भाजपा को बड़ा झटका लगा। जहां 2019 में भाजपा ने 80 में से 62 सीटें जीती थीं, इस बार यह संख्या घटकर 33 सीटों तक सिमट गई। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि यूपी की राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
हरियाणा में राजनीतिक पंडितों ने कांग्रेस की जीत का अनुमान लगाया था, लेकिन नतीजों ने सबको हैरान कर दिया। भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर को पीछे छोड़ते हुए फिर से सरकार बनाई।
24 सालों से सत्ता में रही बीजेडी को इस बार हार का सामना करना पड़ा। भाजपा यहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया।
महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया। एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी ने उद्धव ठाकरे और शरद पवार के गठबंधन को करारी शिकस्त दी।
अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भाजपा को यहां बहुमत की उम्मीद थी, लेकिन वह इसे हासिल नहीं कर सकी।
झारखंड में भाजपा सरकार बनाने में विफल रही, और हेमंत सोरेन ने एक बार फिर से सरकार बनाई।
2024 का सियासी परिदृश्य जनता के बदलते मिजाज और उनकी प्राथमिकताओं का प्रतिबिंब है। चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता केवल वादों पर नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और ठोस काम पर वोट देती है। भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में पकड़ मजबूत बनी रही, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में कई राज्यों में उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विपक्षी पार्टियां, हालांकि कई जगहों पर मजबूत दिखीं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के सामने कोई बड़ा गठबंधन नहीं बना सकीं।