
नई दिल्ली। भारत के लिए उर्वरक एवं कच्चा माल लेकर आने वाले कुल 15 जहाज़ सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इनके भारत पहुंचने पर भारत में खाद के भंडार में बढ़ोतरी हो सकेगी। इनमें 8 जहाजों में 3.32 एलएमटी यूरिया, 4 जहाजों में 2.57 एलएमटी डीएपी तथा 3 जहाजों में 1.11 एलएमटी सल्फर भारत पहुंच रहा है। इसके साथ ही 5 और जहाज भी भारत के लिए रवाना होंगे जिनमें से एक में 0.25 एलएमटी अमोनिया तथा एक अन्य जहाज़ में 0.45 एलएमटी यूरिया लदा हुआ है। शेष दो जहाजों में यूरिया तथा एक जहाज में सल्फर की लोडिंग की जा रही है। कृषि विभाग की ओर से पूरे साल के लिए 383.9 एलएमटी उर्वरकों की जरूरत का अनुमान लगाया है इसके मुकाबले 197.56 एलएमटी का भंडारण है जो करीब 51 प्रतिशत से अधिक है।
केंद्रीय रासायनिक एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि उर्वरक विभाग, राज्य सरकारों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल का प्रभाव देश के किसानों पर बिल्कुल न पड़े और उन्हें किफायती दामों पर समय पर खाद मिल सके। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कीमतों में ऐतिहासिक उछाल के बावजूद भारत सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है।
यूरिया आपूर्ति के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की तथा नीदरलैंड सहित कई देशों से व्यवस्था की गई है। वहीं, डीएपी एवं एनपीके उर्वरकों के लिए रेड सी समुद्री मार्ग के माध्यम से रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया तथा सऊदी अरब से आपूर्ति जुटाई गई। 28 भारतीय मिशनों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं पश्चिम एशिया संकट के चलते उर्वरक संयंत्रों के लिए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता को 65 प्रतिशत तक किया गया था। अब इसके फिर से 100 प्रतिशत होने के बाद उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।
| माह | लक्ष्य | उत्पादन (एलएमटी |
| अप्रैल | 20.34 | 20.98 |
| मई | 22.55 | 25.19 |
| जून | 24.96 | 25.37 |
| कुल (पहली तिमाही) | 67.86 | 71.55 |
| उर्वरक | उपलब्ध भंडार(एलएमटी) |
| यूरिया | 69.08 |
| डीएपी | 16.64 |
| एमओपी | 8.90 |
| एनपीके | 45.64 |
| एसएसपी | 23.09 |
| कुल | 163.35 |