
नई दिल्ली। वैश्विक परिदृश्य में लगातार बदल रही उर्जा चुनौतियों के बीच भारत ग्लोबल निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित जगहों के रूप में उभर कर आ रहा है और निवेशक भारत के अक्षय उर्जा क्षेत्र में करीब 400 बिलियन डॉलर का निवेश करने के लिए उत्सुक हैं। केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को विशेष बातचीत में बताया कि भारत रिन्यूएबल एनर्जी सम्मिट के दौरान हुई सीईओ राउंड टेबल और उसके बाद हुई बैठकों में निवेशकों के रुझान के अनुसार अब तक लगभग 400 बिलियन डॉलर के निवेश की राह तैयार हुई। उन्होंने कहा कि अलग अलग क्षेत्रवार तस्वीर सम्मिट के पूरा होने पर सामने आएगी।
घरों में बन रही सोलर बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने और रात में उपयोग लेने के लिए सब स्टेशनों के पास बैटरी स्टोरेज यूनिट लगाए जाने की योजना है ताकि दिन में बन रही अतिरिक्त बिजली को बाद में उपयोग किया जा सके। इसके लिए राज्यों से बात भी की जा रही है। वहीं कुछ राज्य भी दिन में सस्ती बिजली लेने और रात में महंगी बिजली की आपूर्ति के संकट से बचने के लिए भी स्थानीय स्तर पर योजनाएं बना रहे हैं जिनके लिए केन्द्र विशेष सहयोग पर बात कर रहा है। पीएम सूर्यघर योजना के अगले फेज पर उन्होंने कहा कि इस योजना में तेजी के साथ नए घर जुड़ रहे हैं और अगले वर्ष जनवरी- फरवरी के बाद इसे आगे बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी।
जोशी ने बताया कि अभी 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय उर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है जिसके बाद 2035 तक 300 गीगावाट और बढ़ाए जाने का लक्ष्य लिया गया है। उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद उस समय आने वाली नई तकनीक के लिहाज से 2047 तक करीब 1800 गीगावाट तक का रोडमैप बनाया गया है।
राजस्थान सहित कई राज्यों में विशेष सोलर पार्कों में बन रही सोलर बिजली के इवैक्यूशएन में आ रही कठिनाई को देखते हुए विशेष पैकेज दिया गया है। जोशी ने बताया कि ट्रांसमिशन लाइन्स के अभाव में आ रही इस कठिनाई से उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अवगत करवाया था जिसके बाद पीएम ने एक ही बार में तत्काल इस विशेष पैकेज पर आगे बढ़ने के लिए कहा। इसके तहत अभी इंट्रा स्टेट व्यवस्था बनाई जा रही है।