
नई दिल्ली। यमुना जल बंटवारा समझौते के अनुसार मानसून के अतिरिक्त पानी के राजस्थान पहुंचने के लिए राजस्थान, हरियाणा के बीच मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ ही 32 साल से अटके समझौते के क्रियान्वयन की राह प्रशस्त हो गई है। यहां कर्तव्य भवन में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे केएमओए पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हस्ताक्षर किए।
इस मौको पर शाह ने कहा दोनों राज्यों के लोगों की पानी से जुड़ी 3 दशक पुरानी समस्या का समाधान हो गया है और यह दोनों राज्यों के लिए विन- विन सिचुएशन है और यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिए सहकारी संघवाद के मंत्र का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस परियोजना के निर्माण एवं संचालन के लिए राजस्थान हरियाणा यमुना वाटर एसपीवी का गठन किया जाएगा।
शाह ने बताया कि जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से 3.6 डाया मीटर की तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। जो पानी किसी काम नहीं आ रहा था, इस समझौते के बाद अब वह पानी लोगों की प्यास बुझाने और बड़े तालाबों में संचयित होकर भूजलस्तर बढ़ाने के काम आएगा। शाह ने कहा कि यह जल समझौता भविष्य में अंतरराज्यीय जल संसाधन प्रबंधन के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनेगा।
अभी यह पेयजल के लिए है। बाद में ऊपरी यमुना बेसिन की प्रमुख स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के पूरा होने पर सिंचाई सहित अन्य आवश्यकताओं को भी चरणबद्ध रूप से पूरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा। - सीआर पाटिल, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री
प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र इस ऐतिहासिक उपलब्धि का आधार है। आज उन्हीं के दूरदर्शी नेतृत्व एवं संवेदनशील सोच के कारण दशकों से लंबित यमुना जल समझौता मूर्त रूप ले सका है। इससे राजस्थान की पानी की जरूरत पूरी हो सकेगी। ना केवल शेखावाटी क्षेत्र को, बल्कि हरियाणा में भी दस स्थानों पर पेयजल उपलब्ध होगा। -भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार
वर्षा के पानी को पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान तक ले जाया जाएगा, जिसका पेयजल के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। बहुत लंबे समय से यह लंबित परियोजना अब साकार होने जा रही है। इसमें हरियाणा पूर्ण रूप से सहयोग करेगा । - नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा
राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में भी पीने का पानी पहुंचेगा।
-मानसून के दौरान हथिनी कुंड से 1917 क्यूसेक (577 एमसीएम) पानी
-ऊपरी यमुना के प्रोजेक्ट पूरे होने पर गैर मानसून में 201 एमसीएम पानी और मिलेगा
-राजस्थान हरियाणा यमुना वाटर एसपीवी का गठन, केन्द्र व दोनों राज्यों के प्रतिनिधि रहेंगे इसका हिस्सा
-हथिनीकुंड बैराज से चूरू जिले के हंसियावास तक लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन
-तीन भूमिगत पाइपलाइन डाया 3.6 मीटर
-लागतः लगभग 34,102 करोड़ रुपये
-पश्चिमी यमुना केनाल के 900 आरडी अपस्ट्रीम से मिलेगा पानी
-हरियाणा को पेयजल के लिए गैर मानसून के दौरान 10 पॉइन्टस से पेयजल उपलब्ध करवाया जाएगा
-हासियावास में बनेंगे रिजर्वायर से भी हरियाणा ले सकेगा पानी
-जल प्रवाह एवं संचालन यूवाईआरबी के जरिए
-पानी के कंट्रोल पॉन्ट्स पर स्काडा सिस्टम से सीडब्ल्यू सी करेगा निगरानी
-पाइपलाइन के सहारे 295 किलोमीटर लम्बी सड़क बनेगी
हरियाणा ने पाइपलाइन अलाइनमेंट की सहमति के बाद राजस्थान ने परियोजना की डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेज दी है।
-1994 में 5 मुख्यमंत्रियों और केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री ने किए थे हस्ताक्षर। तब 1119 एमसीएम जल आवंटन हुआ था।
-2001 - उपरी यमुना रिवर बोर्ड की 22वीं बैठक में मानसून के दौरान हथिनी कुंड से 1917 क्यूसेक (577 एमसीएम) और ओखला के लिए 1281 क्यूसेक का आवंटन
-2019- लखवार, किशाऊ और रेणुका बांध प्रोजेक्ट्स के लिए 6 राज्यों के बीच नया एमओयू, राजस्थान को गैर मानसून के समय 201 एमसीएम पानी आवंटित
-फरवरी 2024 - राजस्थान हरियाणा के बीच भूमिगत पाइपलाइन से पानी लाने पर सहमति का एमओयू हुआ
-मई-जून 2026- दोनों राज्यों की संयुक्त टास्क फोर्स की 8 बैठक। डीपीआर केन्द्रीय जल आयोग को सब्मिट। अब एमओए पर हस्ताक्षर
एसपीवी की फाइनल संरचना तय कर, एसपीवी का गठन किया जाएगा परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना या केन्द्र से अन्य वित्तीय सहायता के प्रयास भूमि अवाप्ति के लिए राजस्थान और हरियाणा के अधिकारियों की होगी नियुक्ति डीपीआर की मंजूरी के बाद फेज वाइज प्रोजेक्ट प्लान, टेंडर, वर्कआर्डर की प्रक्रिया