
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर सियासी घमासान के बीच कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति बदल दी है। पार्टी ने उन विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस शुरू किया है, जहां पिछले चुनाव में जीत-हार का अंतर पांच हजार वोट से कम रहा था। तीसरे चरण में शामिल कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा समेत उत्तर पूर्व के राज्यों में कांग्रेस बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर मतदाता सूची के हर दावे और आपत्ति पर नजर रखने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि करीबी मुकाबलों में कुछ हजार वोट भी चुनावी नतीजे बदल सकते हैं, इसलिए इस बार एसआइआर में पार्टी से जुड़े एक-एक वोट बचाने का लक्ष्य रखा गया है।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कर्नाटक में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम में साफ कहा कि जिन सीटों पर जीत-हार का अंतर चार-पांच हजार वोट का होता है, वहां यदि इतने ही मतदाताओं के नाम सूची से हट जाएं या प्रभावित हो जाएं तो कांग्रेस के लिए चुनाव जीतना बेहद कठिन हो जाएगा। उनके इस बयान के बाद पार्टी संगठन ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशिक्षण अभियान तेज कर दिया है।
कांग्रेस अब प्रत्येक बूथ पर मतदाता सूची का मिलान, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटने की शिकायतों की निगरानी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर काम कर रही है। प्रदेश इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि एसआइआर के दौरान आने वाले प्रत्येक दावे और आपत्तियों पर नजर रखें और जरूरत पडऩे पर तुरंत कानूनी और चुनाव आयोग के स्तर पर कार्रवाई करें।
1. पांच हजार से कम अंतर वाली सीटों की अलग निगरानी।
2. बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को एसआइआर का प्रशिक्षण।
3. मतदाता सूची में नाम हटने और जुडऩे की नियमित समीक्षा।
4. दावे-आपत्तियों पर त्वरित कानूनी और संगठनात्मक कार्रवाई।
5. तीसरे चरण के राज्यों में विशेष निगरानी अभियान
कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव के नतीजों में 224 में से 41 सीटों पर जीत-हार का अंतर 5,000 वोट से कम रहा। यानी करीब 18 फीसदी सीटें बेहद करीबी मुकाबले वाली थीं। वहीं तेलंगाना की 119 में से करीब 20 सीटों पर अंतर 5,000 वोट से कम था। इनमें कई सीटों पर अंतर 1,000 वोट से भी कम रहा।
Published on:
30 Jun 2026 01:44 pm
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