
Crude Oil Price:दिल्ली में हुई BRICS बैठक में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति और इसके बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अहम चर्चा हुई। इस दौरान BRICS देशों ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई, व्यापार और सप्लाई चेन का सुचारू प्रवाह बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। यह चर्चा ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें इस सप्ताह कुछ समय के लिए 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
दिल्ली में आयोजित इस अहम BRICS बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मच गई। क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और सप्लाई ठप पड़ने की आशंका के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें कुछ समय के लिए 108 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गईं। तेल की कीमतों में आए इस अचानक उछाल ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
बैठक के बाद आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव सुधाकर डलेला ने बताया कि बैठक में मिडिल ईस्ट के ताजा हालात और ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। सुधाकर डलेला ने कहा कि मिडिल ईस्ट के संदर्भ में ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा सामने आया था। BRICS के अंदर ऊर्जा सहयोग को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण ट्रैक काम कर रहा है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन सभी बिंदुओं पर नेताओं के बीच विचार-विमर्श किया गया।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई के प्रवाह को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए एकजुट होकर प्रयास करने होंगे।
ऊर्जा सुरक्षा पर BRICS का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब दुनिया के प्रमुख ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर जोखिम बढ़ा हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी व्यवधानों ने तेल और गैस की आवाजाही को प्रभावित किया है। वहीं, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से बाब अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री मार्ग में संभावित व्यवधान की आशंका ने भी चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
BRICS नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा को केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि देशों के व्यापक विकास से जुड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना है कि स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सामाजिक और आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और आम लोगों के कल्याण के लिए बेहद जरूरी है। इसी वजह से नेताओं ने ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।