
नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ष्ट्रपति पेजेश्कियान का बड़ा बयान, photo (source: ANI)
Iran America Conflict: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने शनिवार को कहा कि ब्रिक्स समूह की स्थापना खासतौर पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंधों का मुकाबला करने के इरादे से हुई थी। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर 'इंडिया टुडे' को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यह समूह वाशिंगटन की मनमानी नीतियों को चुनौती देने के लिए बना है।
पेजेश्कियान के अनुसार, अमेरिका जिस तरह से मनचाहे देशों पर प्रतिबंध लगाता आया है, ब्रिक्स का मकसद उसी प्रवृत्ति को समाप्त करना है। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे प्रतिबंधों से अप्रभावित रहने वाले व्यापार और सहयोग के नए रास्ते तलाशें, ताकि दुनिया एकतरफा नीतियों के दबाव से मुक्त हो सके।
क्षेत्रीय तनाव पर बोलते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने इस बात को पूरी तरह खारिज किया कि संघर्ष शुरू करने का दोष उनके देश पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बिना किसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार के हमले किए, जिनमें ईरान के राजनीतिक-सैन्य नेतृत्व, वैज्ञानिकों, छात्रों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। उन्होंने इसे भारी मानवीय क्षति बताते हुए तेहरान की जवाबी सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा करार दिया।
पेज़ेश्कियान ने चाबहार बंदरगाह के जरिए भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की वकालत की और ईरान को उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी के लिए रणनीतिक केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत बंदरगाह में निवेश कर सकता है और सहयोग सिर्फ ढांचागत परियोजनाओं तक सीमित न रहकर व्यापार व साझेदारी के व्यापक नेटवर्क तक बढ़ सकता है।
शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में भारत ने पश्चिम एशिया के विवादों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने की अपनी नीति दोहराई, साथ ही नौवहन स्वतंत्रता व समुद्री सुरक्षा पर भी बल दिया।
पेज़ेश्कियान के बयानों से स्पष्ट है कि ईरान ब्रिक्स को पश्चिमी वित्तीय प्रभुत्व से मुक्ति दिलाने वाले एक सशक्त मंच के रूप में देखता है, और सदस्य देशों के बीच व्यापार व वित्तपोषण के वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देने का पक्षधर है।
Updated on:
12 Sept 2026 10:51 pm
Published on:
12 Sept 2026 10:51 pm
