रियल एस्टेट: घर देने में देरी पर मुआवजा पाने का हक
नई दिल्ली.देशभर में लाखों लोग बिल्डरों की लेटलतीफी और बदनीयती के कारण घर का पेमेंट करने के बावजूद घर का पजेशन पाने के लिए कई वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने घर खरीददारों के हक में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। आयोग ने कहा कि लोग सपनों के साथ घर खरीदते हैं, ऐसे में उन्हें घर के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। एनसीडीआरसी ने बेंगलूरु के एनडी डेवलपर्स की और से खरीदारों को समय से घर का कब्जा नहीं दिए जाने को सेवा में कमी माना है। आयोग ने घर देने में देरी के लिए बिल्डर के साथ-साथ जमीन मालिक को भी जिम्मेदार ठहराया है और खरीददारों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
9% ब्याज के साथ कुल राशि लौटाने का आदेश
रेरा कानून के साथ एनसीडीआरसी ने भी अपने फैसले में कहा है कि कब्जा देने में देरी पर बिल्डर को कुल रकम का उतना फीसदी मुआवजा देना होगा जितना भुगतान में देरी होने पर होने उपभोक्ता से ब्याज के रूप में वसूलते हैं। आयोग ने दो महीने के अंदर 9त्न ब्याज के साथ कुल राशि लौटाने का आदेश दिया है। अगर राशि दो माह में नहीं लौटाई जाती तो पूरी रकम पर सालाना 12त्न की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।
ये हैं घर खरीदारों के अधिकार
- यदि बिल्डर तय समय में मकान का कब्जा नहीं दे पाता है तो बदले में उसे खरीदार को मुआवजा देना होता है।
- बिल्डर परियोजना रेरा में पंजीकृत है या नहीं, इससे संबंधित दस्तावेज दिखाने से इनकार नहीं कर सकते।
- जिस जमीन पर परियोजना बन रही है उसका मालिकाना हक, पट्टे से संबंधित दस्तावेज देखना भी खरीदारों का अधिकार है।
- परियोजना और मकान का मानचित्र सहित संबंधित प्राधिकरणों की ओर से निर्माण की मंजूरी के लिए जारी एनओसी भी बिल्डर से मांग सकते हैं।