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सावधान! घर के बाहर लगे कैमरे भी बन सकते हैं दुश्मन की आंख

नई दिल्ली। भारत में सुरक्षा के लिए लगाए गए लाखों सीसीटीवी कैमरे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। हालांकि केन्द्र सरकार ने हाल ही में कुछ चीनी सीसीटीवी कैमरों पर रोक लगाई है लेकिन बड़ी संख्या में पहले से लगे कैमरे बड़ी चिंता का विषय हैं। एक अनुमान के अनुसार देश में कुल […]

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नई दिल्ली। भारत में सुरक्षा के लिए लगाए गए लाखों सीसीटीवी कैमरे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। हालांकि केन्द्र सरकार ने हाल ही में कुछ चीनी सीसीटीवी कैमरों पर रोक लगाई है लेकिन बड़ी संख्या में पहले से लगे कैमरे बड़ी चिंता का विषय हैं।

एक अनुमान के अनुसार देश में कुल 30 लाख से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे होने का अनुमान है। इनमें 10 लाख कैमरे सरकारी संस्थानों में चीनी कंपनियों के होने के अनुमान हैं। दिल्ली में ही 2.74 लाख में से 1.4 लाख कैमरे चीनी हैं। हालांकि सरकार ने 2024 के बाद इस पर सख्ती बरती है। सीसीटीवी के बढ़ते खतरे को देखते हुए केन्द्रीय खुफिया एजेंसीज, आईबी सीसीटीवी नेटवर्क की देशव्यापी ऑडिट करवाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं दिल्ली में चरणबद्ध तरीकों से चीनी सीसीटीवी कैमरों को बदला जा रहा है।

घरों में बढ़ रही चीनी उपकरणों की घुसपैठ

लाखों भारतीय घरों में चीनी स्मार्ट सीसीटीवी और आईओटी उपकरण हैं। एक सर्वे के अनुसार 79% भारतीय घरों में चीनी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं। 37% लोग ऐप से डिवाइस से जुड़े हैं। होम सीसीटीवी, स्मार्ट कैमरा, बेबी मॉनिटर जैसे डिवाइस डेटा क्लाउड पर भेजते हैं। अधिकांश के सर्वर चीन में हैं।

सार्वजनिक जगहों पर लगे कैमरे हैं चिंता का विषय

सार्वजनिक जगहों स्टेशन, मेट्रो, ट्रैफिक लाइट्स, सरकारी दफ्तर, सड़कों पर और घरों में गलियों में लगे कैमरे खास तौर पर संवेदनशील हैं। इनका डाटा क्लाउड पर सेव होता है जहां से कमजोर पासवर्ड, बैकडोर और अनएन्क्रिप्टेड सिस्टम या वहां की खुफिया एजेंसियों के कारण जासूसी और सैन्य खतरा, संवेदनशील ठिकानों की निगरानी और वीआईपी व सुरक्षा बलों के मूवमेंट ट्रैकिंग व स्ट्रेटेजिक लोकेशन की जानकारी लीक होने का खतरा है।

क्यों खतरनाक हैं चीनी सीसीटीवी?

चीन में इंटेलिजेंस कानून(2017) के मुताबिक चीनी कंपनियों को सरकार के साथ डेटा शेयर करना जरूरी है। इससे भारत में लगे वहां के सीसीटीवी कैमरे बीजिंग की आंख और कान बन सकते हैं।

पहले सामने आए सुरक्षा खतरे

गाजियाबाद जासूसी मामले में सीसीटीवी फुटेज पाकिस्तान तक भेजी जा रही थी। रेलवे में भी एक मामले में कैमरों के मूल देश को छिपाने की आशंका का मामला सामने आया था। वहीं पावर ग्रिड पर साइबर हमलों में सीसीटीवी, डीवीआर के इस्तेमाल की आशंका।

वैश्विक युद्धों में सीसीटीवी का इस्तेमाल

ईरान-इजराइल संघर्ष में सीसीटीवी से टारगेट और हमले प्लान होने की आशंका है। वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध में कैमरों से सैनिकों की लोकेशन ट्रैक की गई। लेबनान में पेजर्स में धमाकों के बाद से भारत में सीसीटीवी कैमरा, स्मार्ट मीटर, पार्किंग सेंसर्स, ड्रोन पार्ट और लैपटॉप व डेस्कटॉप को भी विश्वसनीय जगहों से मंगवाने पर विचार शुरू हुआ।

भारत ही नहीं अन्य देशों ने भी की है कार्रवाई

अमेरिका ने 2022 में ही कुछ चीनी कंपनियों पर बैन लगाया था। ब्रिटेन में सरकारी इमारतों में चीनी सीसीटीवी लगाने पर प्रतिबंध है। ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा संस्थानों में इन्हें हटाने का आदेश दिया है। दक्षिण कोरिया में सैन्य ठिकानों से 1300 कैमरे हटाए गए हैं। अब तक दस से ज्यादा देशों ने कड़ी कार्रवाई की है।

भारत सरकार के कदम

1 अप्रैल 2026 से बिना एसटीक्यूसी सर्टिफिकेशन के सीसीटीवी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। विदेशी सीसीटीवी के लिए सोर्स कोड जांच, चिपसेट की जानकारी देना अनिवार्य, एन्क्रिप्शन और साइबर सुरक्षा टेस्ट जरूरी किए हैं। हर विदेशी कैमरे की हार्डवेयर टेस्टिंग, सॉफ्टवेयर ऑडिट, सोर्स कोड वेरीफिकेशन अनिवार्य है।

80 फीसदी कंपोनेंट चीन से

एक मार्केट रिसर्च संस्थान के अनुसार भारत का सीसीटीवी कैमरा बाजार 4.8 बिलियन डॉलर का है जिसके 2031 तक करीब 14 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। अभी इसमें चीनी कंपनियों की तीस फीसदी हिस्सेदारी है वहीं 80 प्रतिशत से ज्यादा कंपोनेंट चीन से आते हैं।

इनका कहना है

भारत में डाटा प्रोटेक्शन को लेकर सजगता आई है। सरकार ने डेटा प्रोटेक्शन को लेकर क़ानून और अब गाइडलाइन बनाए हैं। राज्य सरकारों और संस्थानों के स्तर पर भी डेटा सिक्योरिटी ऑडिट की जरूरत है । सीसीटीवी कैमरे आवश्यक हैं स्थानीय उत्पाद और सर्वर की उपलब्ध बनाए रखनी जरूरी है। पहले से लगे कैमरों का डाटा लोकल सर्वर पर शिफ़्ट या चरणबद्धता से इन्हें बदला जाना सुरक्षा के लिहाज़ से जरूरी है।

- डॉ. रामानंद, एआई, डेटा सिक्योरिटी विशेषज्ञ व फाउंडर डायरेक्टर, सेंटर ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस, नई दिल्ली

कैसे काम करता है यह खतरा?

बैकडोर एक्सेस- कई कैमरों में हिडन बैकडोर या डिफाल्ट पासवर्ड की सेटिंग होने पर बिना जानकारी के रिमोट लोगिन संभव है जिससे सुरक्षा को खतरा है। डेटा राउटिंग रिस्क फुटेज के क्लाउड पर ट्रैवल करने और विदेशी सर्वर पर स्टोर होने के कारण डेटा ट्रैवलिंग के दौरान हैक होने व डेटा के मेटाडेटा (लोकेशन, टाइम, मूवमेंट) के कारण यह बड़ा खतरा हो सकता है। फर्मवेयर कंट्रोल सीसीटीवी के सॉफ्टवेयर के फर्मवेयर अपडेट और उसका कंट्रोल कंपनी के सर्वर से जुड़ा होता है। अपडेट्स भी कंपनी के सर्वर से आते हैं। इसमें मेलिशियस कोड इंजेक्ट किया जा सकता है। बोटनेट अटैक की आशंका हजारों कैमरे मिलकर बोटनेट के रूप में साइबर अटैक नेटवर्क बन सकते हैं।