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‘हर तरफ सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थीं’, दिल्ली इमारत हादसे की गवाहों ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

Saket Building Collapse: दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास चार मंजिला इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।

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Delhi Building Collapse

बिल्डिंग गिरने पर भीड़ (Photp-IANS)

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में शनिवार रात एक बड़ा हादसा हो गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। साकेत मेट्रो स्टेशन के पास बनी पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। जिस समय यह हादसा हुआ, इमारत में मेस, पीजी, कोचिंग सेंटर, कैफे और कई ऑफिस चल रहे थे। इमारत गिरते ही लोग मलबे में फंस गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। रातभर बचाव टीमों ने लोगों को निकालने का काम किया। अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।

चारों तरफ मची अफरा-तफरी

इमारत गिरते ही पूरे इलाके में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। कुछ ही सेकंड में पूरी इमारत ढहकर मलबे में बदल गई। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। धूल का इतना बड़ा गुबार उठा कि कुछ देर तक सामने का नजारा भी साफ नहीं दिख रहा था।

मलबे के नीचे से आती रहीं मदद की पुकारें

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद काफी देर तक मलबे के नीचे से लोगों की चीखें और मदद की आवाजें सुनाई देती रहीं। स्थानीय निवासी सबसे पहले मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर लोगों को निकालने का प्रयास किया। कई लोगों ने बताया कि हादसा इतना भयावह था कि आसपास की इमारतों में रहने वाले लोग भी दहशत में आ गए और रातभर सो नहीं सके।

परिजनों की बेचैनी बढ़ी, अपनों की तलाश में गुजरी रात

हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों और दोस्तों की तलाश में पहुंचे। कई परिवार रातभर मलबे के पास खड़े होकर किसी अच्छी खबर का इंतजार करते रहे। कुछ परिजनों ने राहत और बचाव कार्य की गति को लेकर नाराजगी भी जताई। परिजनों ने बचाव कार्य पर उठाए सवाल

मलबे में फंसी एक महिला की बेटी ने बचाव कार्य को लेकर प्रशासन पर नाराजगी जताई। उसने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि पुलिस यहां मौजूद है, लेकिन हमारे परिवार के सदस्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रही। स्थानीय लोग पुलिस से बेहतर काम कर रहे थे। उन्होंने तीन लोगों को बचाया, जबकि पुलिस ने केवल दो लोगों को निकाला। कोई भी मेरे सवालों का जवाब नहीं दे रहा है।

महिला ने आगे कहा कि अगर नेता यहां आते हैं तभी कुछ होता है। इस इमारत का निर्माण जोखिम भरा था और हमने इसकी शिकायत भी की थी। मैं अपनी मां को देखना चाहती हूं, लेकिन मुझे अंदर जाने नहीं दिया जा रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र और ऑफिस कर्मचारी आते थे। कुछ निवासियों का अनुमान है कि मलबे के नीचे 100 से 150 लोग तक फंसे हो सकते हैं।

हादसे की वजह अब भी रहस्य

एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, डीडीएमए और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाया गया। फिलहाल इमारत गिरने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के समय इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करने और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है कि बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक हर संभावित फंसे व्यक्ति का पता नहीं चल जाता।