जिला प्रोबेशन अधिकारी और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष और सदस्यों पर सरकारी पैसे के गबन के आरोप में कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज की गई है।
Corruption उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भ्रष्टाचार का एक हैरान कर देने वाला मामले सामने आया है। नगर के ही एक व्यक्ति की शिकायत पर एंटी करप्शन कोर्ट ने जिला प्रोबेशन अधिकारी समेत बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी उपस्थिति दिखाकर सरकारी खजाने से धन की निकासी कर ली। इतना ही नहीं सरकारी दस्तावेजों में भी हेरा-फेरी के आरोप हैं।
एंटी करप्शन कोर्ट के आदेश पर सहारनपुर के जिला प्रोबेशन अधिकारी और बाल कल्याण समिति के सदस्य व अध्यक्ष के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इन पर कागजों में हेराफेरी करके सरकारी पैसे के गबन का आरोप है। कोतवाली मंडी क्षेत्र के रहने वाले प्रशांत वर्मा की ओर से एक शिकायत दी गई थी। इसी शिकायत का संज्ञान लेते हुए विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट मनीष कुमार प्रथम की अदालत ने मामला दर्ज करने के आदेश दिए। कोतवाली सदर बाजार में यह मामला दर्ज किया गया था। अब इस मामले में पुलिस ने कार्यवाही तेज कर दी है।
मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए जांच अधिकारी ने सरकारी रिकार्ड को तलब कर लिया है। आरोप है कि सरकारी रिकार्ड में गलत तरीके से सदस्यों की उपस्थिति दिखाई गई और सरकारी खाते से पैसा उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। आरोपों के ही अनुसार जिन सदस्यों की उपस्थिति दिखाई गई वो मिटिंग में नहीं आए और उनके हस्ताक्षर भी विभागीय उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज नहीं हैं। इस आधार पर अब जांच अधिकारी उन सभी रिकार्ड की जांच के लिए प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय पहुंचे हैं। इससे पहले इस मामले में वादी के बयान लिए गए। वादी का कहना है कि अगर मामले में निष्पक्ष जांच की गई तो सभी आरोपों की पुष्टि होगी और भ्रष्टाचार की नई परतें खुलेंगी।
इस मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। वादी प्रशांत वर्मा का कहना है कि उन्होंने पुलिस के अफसरों और जिलाधिकारी को भी शिकायत करते हुए मामले में FIR कराने के लिए कहा था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में उसे न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उधर इस मामले में जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय का कहना है कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वह निराधार हैं। इस प्रकरण में जिलाधिकारी के स्तर से दो बार जांच करवाई जा चुकी हैं। जांच में कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि आगे भी जो जांच होगी उसमे पूरा सहयोग किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या खुलासे होते हैं।