
Delhi EV Policy 2026: दिल्ली में नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 को मिली कैबिनेट की मंजूरी, 1 जुलाई से होगी लागू दिल्ली सरकार ने सोमवार को राजधानी के लिए नई 'इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026' को कैबिनेट की हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए उपराज्यपाल के पास भेज दिया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सचिवालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि यह नीति दिल्ली में प्रदूषण की समस्या और परिवहन चुनौतियों से निपटने के लिए एक बड़ा कदम साबित होगी। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो यह नीति 1 जुलाई से लागू हो जाएगी और 31 अगस्त 2031 तक प्रभावी रहेगी। इस नई नीति के तहत सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए चरणबद्ध तरीके से खरीद सब्सिडी देने का खाका तैयार किया है। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खरीद पर पहले साल अधिकतम 30 हजार रुपए तक की सब्सिडी मिलेगी।
इसी तरह, इलेक्ट्रिक ऑटो पर 50 हजार रुपए और एन1 श्रेणी के हल्के इलेक्ट्रिक ट्रकों की खरीद पर पहले वर्ष 1 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। हालांकि, निजी इलेक्ट्रिक कारों के लिए सीधे तौर पर कोई खरीद सब्सिडी नहीं रखी गई है। पुरानी कारों को हटाने के लिए सरकार ने स्क्रैपिंग इंसेंटिव का प्रावधान किया है। यदि कोई उपभोक्ता अपने पुराने बीएस-4 या उससे नीचे के मानक वाले वाहन को कबाड़ (स्क्रैप) में देता है, तो उसे 1 लाख रुपए तक का इंसेंटिव प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, व्यावसायिक वाहनों और 30 लाख रुपए तक की कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत की पूरी छूट दी जाएगी।
हाइब्रिड तकनीक को बढ़ावा देने के लिए भी नीति में विशेष प्रावधान हैं। इसके तहत स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिलेगी। हालांकि, प्रीमियम श्रेणी का ध्यान रखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों की खरीद पर टैक्स या पंजीकरण शुल्क में कोई छूट नहीं दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य इन रियायतों के जरिए दिल्ली में ई-वाहनों की संख्या में तेजी से इजाफा करना है।