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13 परिजन, 2 कारें और एक छूटा एग्जिट; हरिद्वार की यात्रा कैसे बन गई मौत का सफर

Delhi Dehradun Expressway Accident: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भीषण कार हादसा; हरिद्वार जा रहे बहादुरगढ़ के एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 3 घायल। 8 साल के मासूम और माता-पिता की मौत से अनाथ हुए बच्चे; यूपी सरकार से मदद की गुहार।
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नई दिल्ली

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Imran Ansari

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Updated: 29 Jun 2026, 2:52 PM IST

Delhi Dehradun Expressway Accident

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भीषण कार हादसा

Haridwar Family Trip Crash: पुलिस और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, मूल रूप से सोनीपत के रहने वाले और पिछले 5 सालों से बहादुरगढ़ में रह रहे इस परिवार के कुल 13 सदस्य शुक्रवार को दो अलग-अलग गाड़ियों में सवार होकर हरिद्वार के लिए निकले थे। जून के मध्य में ही इस यात्रा की तारीखें तय हो चुकी थीं और होटल की बुकिंग भी हो गई थी। सब कुछ उनकी परंपरा के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था, लेकिन एक्सप्रेसवे पर मौत उनका इंतजार कर रही थी।

मंजिल से महज एक घंटा पहले आई 'कयामत'

हादसे का शिकार हुई पहली कार में परिवार के 7 सदस्य सवार थे, जबकि बाकी लोग दूसरी कार में थोड़ा पीछे चल रहे थे। मृतक सुदेश देवी के बेटे सत्यदेव ने रोते हुए बताया कि हम दोपहर 12 बजे घर से निकले थे। करीब 3 बजे मेरे पास भाभी का फोन आया कि उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है। जब तक हम मौके पर पहुंचे, उन्हें अस्पताल ले जाया जा चुका था। हमारी मंजिल (हरिद्वार) वहां से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर थी।'

हादसे में उजड़ गया पूरा परिवार

पुलिस ने मृतकों की पहचान शिवांश (8 वर्ष), उसकी दादी सुदेश देवी ( 65 वर्ष), चाचा प्रवीण ( 42 वर्ष) और चाची प्रीति (33 वर्ष) के रूप में की है। हादसे में मारे गए प्रवीण और प्रीति के दो बच्चे 10 और 13 वर्ष खुशनसीबी से दूसरी कार में सवार थे और सुरक्षित हैं। सत्यदेव ने सुबकते हुए बताया कि वे मासूम श्मशान घाट पर मेरे साथ खड़े थे और अपने माता-पिता के शवों को देख रहे थे।

अस्पताल में जिंदगी की जंग

प्रवीण के भाई जयदेव अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, वे गहरे सदमे में हैं और सीटी स्कैन के बाद भी उनकी हालत स्थिर नहीं है। जयदेव को अभी यह भी नहीं बताया गया है कि इस हादसे में उनके 8 साल के बेटे शिवांश की मौत हो चुकी है। घायल होने वालों में एक 2 साल का मासूम भी शामिल है।

अब हम कैसे जिएंगे?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहारहादसे में मारे गए प्रवीण और घायल जयदेव मिलकर बहादुरगढ़ में ट्रांसपोर्ट का बिजनेस चलाते थे। पूरा संयुक्त परिवार (Joint Family) आर्थिक रूप से इन्हीं दोनों भाइयों पर निर्भर था। परिवार में 4 से 5 छोटे बच्चे हैं, जिनके सिर से अब बड़ों का साया उठ चुका है।

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