
Fake CBI Raid: सोचिए, रात के वक्त अचानक आपके घर के दरवाजे की घंटी बजे। बाहर 6-7 लोग खड़े हों, जिन्होंने CBI के लोगो वाली जैकेट पहनी हो, गले में सरकारी कार्ड लटक रहे हों और वे खुद को CBI अफसर बताकर आपके घर की तलाशी लेने की बात कहें। जाहिर है, कोई भी डर जाएगा! दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे ही शातिर गैंग को पकड़ा है, जो लोगों के इसी डर का फायदा उठाकर उनसे ठगी और वसूली करता था।
पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग पहले पूरी प्लानिंग करता था, रेकी करता था और फिर नकली रेड (छापेमारी) मारने पहुंच जाता था।
पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि यह गैंग किसी भी घर में यूं ही नहीं घुस जाता था। पहले वे अपने टारगेट की पूरी जानकारी जुटाते थे। रोहिणी जिला DCP शशांक जायसवाल ने बताया कि 11 अगस्त को पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग CBI अधिकारी बनकर प्रथ्म अग्रवाल के घर रेड करने पहुंचे हैं। आरोपी रात के समय वहां पहुंचे थे। DCP के मुताबिक, परिवार ने समझदारी दिखाते हुए दरवाजा नहीं खोला। उन्होंने तुरंत पुलिस और पड़ोसियों को सूचना दी। इसके बाद करीब 7-8 लोगों का समूह, जिसमें दो महिलाएं भी शामिल थीं, वहां से फरार हो गया।
इस खेल में 63 साल के एक पूर्व बैंक अधिकारी कुलदीप शर्मा का नाम भी आया है। पुलिस के मुताबिक, कुलदीप शर्मा को पीड़ित परिवार के बैंक खातों और पैसों की अच्छी जानकारी थी। उन्होंने ही परिवार का पता और उनकी आर्थिक स्थिति की पूरी रिपोर्ट इस गैंग को दी थी। इसके बाद नकली रेड का पूरा प्लान तैयार किया गया।
प्लानिंग के बाद गैंग की पूजा अग्रवाल ने अपने एक रिश्तेदार चंदर प्रकाश शर्मा की मदद से कुछ बेरोजगार लड़कों को तैयार किया। आरोप है कि इन लड़कों को हर दिन के हिसाब से पैसे (दिहाड़ी) दिए जाते थे और नकली रेड में शामिल किया जाता था।
गैंग की कोशिश रहती थी कि घर पर 6-7 लोग एक साथ जाएं ताकि सामने वाला परिवार देखते ही घबरा जाए। डराने के लिए CBI के लोगो वाली जैकेट और फर्जी पहचान पत्र (ID Card) का इस्तेमाल किया जाता था।
यह पूरा मामला 11 अगस्त की रात करीब 10 बजे का है। गैंग के लोग प्रशांत विहार में रहने वाले प्रथ्म अग्रवाल के घर पहुंचे। खुद को CBI अफसर बताकर घर की तलाशी लेने की बात कही। लेकिन परिवार डरा नहीं, उन्होंने तुरंत उनसे सर्च वारंट और कागजात मांग लिए। वारंट मांगते ही नकली अफसरों के हाथ-पांव फूल गए, फिर भी वे दबाव बनाने की कोशिश करते रहे और करीब डेढ़ घंटे तक घर के बाहर ही डटे रहे।
जब आसपास के पड़ोसी जमा होने लगे, तो आरोपियों ने बहाना बनाया कि 'नोटिस गाड़ी में रखा है, लेकर आते हैं' और वहां से खिसक गए। इसके बाद उन्होंने परिवार के मोबाइल पर एक फर्जी CBI नोटिस भेजा और फिर उसे डिलीट कर दिया। लेकिन परिवार की होशियारी काम आई और उन्होंने उस नोटिस का स्क्रीनशॉट ले लिया था।
परिवार की शिकायत के बाद 19 अगस्त को प्रशांत विहार थाने में केस दर्ज हुआ। पुलिस ने इलाके के CCTV फुटेज और मोबाइल रिकॉर्ड खंगाले। इसी दौरान मिले स्क्रीनशॉट की मदद से पुलिस आखिरकार इन 7 आरोपियों तक पहुंच गई।
पुलिस ने इनके पास से 8 मोबाइल फोन, CBI के लोगो वाली जैकेट और कई फर्जी सरकारी ID कार्ड बरामद किए हैं। इनके फोन से ऐसे वीडियो भी मिले हैं जिनमें ये लोग असली CBI या ED अफसरों की तरह अलग-अलग जगहों पर रेड मारते दिख रहे हैं।
पुलिस को शक है कि इस गैंग ने दिल्ली के अलावा मुंबई और जम्मू-कश्मीर में भी ऐसी 2-3 नकली रेड की हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगा रही है कि इन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और क्या इस गैंग के पीछे कोई बड़ा मास्टरमाइंड भी है।