
Delhi Gymkhana Club scam: दिल्ली का मशहूर जिमखाना क्लब इस वक्त बड़े विवादों के घेरे में है। अंदरूनी रिकॉर्ड्स और ड्राफ्ट फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एक तरफ सरकार ने सुरक्षा कारणों से क्लब को अपनी 27.3 एकड़ की जमीन खाली करने को कहा है, तो दूसरी तरफ क्लब के अंदर मरे हुए लोगों के नाम पर बिलिंग होने और वीआईपी जोन में ड्रोन उड़ाने जैसी गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली जिमखाना क्लब के हैरान करने वाले मामले तब सामने आए हैं जब सरकार ने इस क्लब को अपनी 27.3 एकड़ की कीमती जमीन खाली करने का आदेश दे दिया है। जमीन खाली कराने वाली बात पर सरकार का यह कहना है कि इस जमीन का इस्तेमाल देश के रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए किया जाएगा। फिलहाल जिमखाना खाली कराने का मामला अदालत में चल रहा है।
क्लब के सरकारी रिकॉर्ड्स की जांच की तो कई अजीब बातें सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि जो सदस्य अब इस दुनिया में नहीं हैं, मतलब की जिनकी मौत हो गई है, ऐसे लोगों के नाम पर बने काड्रर्स से कल्ब में बेफिक्र होकर खाने-पीने का सामान खरीदा जा रहा था। इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद संवेदनशील मामला भी सामने आया है, जहां वीआईपी जोन यानी देश के प्रधानमंत्री के आवास के पास क्लब परिसर से एक ड्रोन उड़ाया गया था। रिपोर्ट में कम से कम 31 ऐसे संभावित मामले दर्ज किए गए हैं, जहां बिल उन सदस्यों के नाम पर फाड़े गए थे जो पहले ही मर चुके हैं।
बता दें कि क्लब में गड़बड़ियों का सिलसिला यहीं नहीं खत्म हुआ। क्लब ने नियमों को ताक पर रखकर अपने ही कुछ चुनिंदा सदस्यों को कानूनी और दूसरी सेवाएं देने के लिए काम पर रख लिया था। इसी वजह से कोर्ट-कचहरी और वकीलों के नाम पर होने वाला क्लब का कानूनी खर्च बहुत तेजी से करोड़ों में जा पहुंचा है। जब क्लब के एक बहुत पुराने और लंबे समय से काम कर रहे ऑडिटर ने इन खातों की जांच के लिए जरूरी रिकॉर्ड्स और फाइलें देखनी चाहीं, तो उन्हें वो कागजात देखने ही नहीं दिए गए। इस बात से नाराज होकर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
रिकॉर्ड्स से यह भी पता चलता है कि क्लब के आम सदस्यों और सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासन के बीच भारी टकराव चल रहा है। क्लब के सदस्यों ने क्लब के ऑडिटेड अकाउंट्स को मंजूरी देने से साफ मना कर दिया है। इसका बड़ा कारण यह है कि अप्रैल 2022 में सरकार ने जब क्लब का मैनेजमेंट अपने हाथ में लिया था, तो तुरंत ही एक घोटाले की जांच करवाई थी। लेकिन सरकारी प्रशासन अब इस जांच रिपोर्ट को बाकी सदस्यों के सामने नहीं ला रहा है और इसे दबाकर बैठा है।
द इंडियन एक्सप्रेस ने उस फॉरेंसिक ऑडिट की एक ड्राफ्ट रिपोर्ट को खुद देखा है, जिसमें साल 2017-18 से लेकर 2021-22 तक के वित्तीय खर्चों की गहरी जांच की गई थी। इस रिपोर्ट को बेकर टिली बिजनेस सर्विसेज नाम की एजेंसी ने तैयार किया था, जिसे सरकारी प्रशासन ने नवंबर 2022 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल को अपनी तिमाही स्टेटस रिपोर्ट के हिस्से के रूप में सौंपा था। इसके नतीजे बहुत बड़े और अहम हैं।