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क्यों इतना रसूखदार है दिल्ली जिमखाना क्लब? 40 साल लंबी वेटिंग लिस्ट और करोड़ों की कमाई

Delhi Gymkhana Club News: दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 1913 में हुई थी। लुटियंस दिल्ली के इस पॉश क्लब के सदस्यों की संख्या 14,500 से अधिक है। इनमें प्रतिष्ठित सदस्य, कॉरपोरेट सदस्य, महिला सदस्य, डिप्लोमैट और अन्य श्रेणियों के सदस्य शामिल हैं। क्लब की कुल नेटवर्थ करीब 129 करोड़ रुपये है।

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दिल्ली जिमखाना क्लब की अंदर की तस्वीर (Photo: IANS)

देश के सबसे प्रतिष्ठित और हाई-प्रोफाइल क्लबों में गिने जाने वाले दिल्ली जिमखाना क्लब को सरकार ने खाली करने का आदेश जारी किया है। केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए क्लब को 5 जून तक पूरा 27.3 एकड़ परिसर सौंपने का निर्देश दिया है, जिससे इसके बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि इसके खिलाफ क्लब के सदस्य सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। इसी बीच अब इस ऐतिहासिक क्लब की कमाई को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली जिमखाना क्लब ने वर्ष 2023-24 में अपने मुनाफे में लगभग 10 गुना बढ़ोतरी दर्ज की है। क्लब की कमाई 93 लाख रुपये से बढ़कर 9.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसके साथ ही क्लब की कुल नेटवर्थ भी करीब 129 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना वर्ष 1913 में हुई थी। पहले इसका नाम 'इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' था, लेकिन आजादी के बाद इसका नाम बदल दिया गया। लुटियंस दिल्ली के इस पॉश क्लब के सदस्यों की संख्या 14,500 से अधिक बताई जाती है। इनमें प्रतिष्ठित सदस्य, कॉरपोरेट सदस्य, महिला सदस्य, डिप्लोमैट और अन्य श्रेणियों के सदस्य शामिल हैं।

लगातार बढ़ रही दिल्ली जिमखाना की कमाई

दिल्ली जिमखाना क्लब की कमाई और मुनाफे में वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। क्लब का सरप्लस यानी मुनाफा एक साल में करीब 10 गुना बढ़कर 93 लाख रुपये से 9.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक, क्लब की कुल आय 68.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 79.8 करोड़ रुपये हो गई, जबकि ऑपरेशनल रेवेन्यू 60.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 71.2 करोड़ रुपये पहुंचा। खास बात यह रही कि खर्चों में सिर्फ 4.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि टैक्स से पहले का सरप्लस 2 करोड़ रुपये से बढ़कर 10.6 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि हाई-प्रोफाइल दिल्ली जिमखाना क्लब की वित्तीय स्थिति लगातार मजबूत होती जा रही है।

रेस्टोरेंट, बार और बैंक्वेट से सबसे ज्यादा कमाई

दिल्ली जिमखाना क्लब गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत है। इसके बावजूद क्लब की कमाई का सबसे बड़ा जरिया इसके रेस्टोरेंट, बार और बैंक्वेट रहे। 2023-24 के दौरान क्लब ने इन सेवाओं से करीब 43 करोड़ रुपये की बंपर कमाई की।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक क्लब के निवेश 162 करोड़ रुपये तक पहुंच गए थे, जबकि म्यूचुअल फंड्स का बाजार मूल्य 217 करोड़ रुपये बताया गया। क्लब का सबसे बड़ा निवेश कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स और डेट फंड्स में है।

बैंक एफडी और करोड़ों की नकदी भी मौजूद

दिल्ली जिमखाना क्लब ने 24 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबी अवधि की बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश कर रखी है। वहीं, मार्च 2024 तक क्लब के बैंक खातों में 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकद राशि मौजूद थी।

दूसरी ओर, देनदारियों की बात करें तो क्लब के पास सदस्यों से लिए गए 11.2 करोड़ रुपये के सिक्योरिटी डिपॉजिट और 24.5 करोड़ रुपये की आवेदन राशि भी मौजूद है।

जमीन किराए को लेकर केंद्र की बड़ी मांग

क्लब के ऑडिटर 'एवीए एंड एसोसिएट्स' (AVA & Associates) ने अपनी रिपोर्ट में एक बड़े वित्तीय विवाद का जिक्र किया है। इसमें बताया गया कि शहरी विकास मंत्रालय के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने अप्रैल 2018 से लागू होने वाले बढ़े हुए ग्राउंड रेंट के रूप में 24.7 करोड़ रुपये की मांग की है।

ऑडिटर ने यह भी बताया कि 2020-21 से 2022-23 तक के ऑडिटेड खातों को सदस्यों से औपचारिक मंजूरी नहीं मिल सकी थी, बावजूद इसके उन्हें रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल किया गया।

सदस्यता को लेकर लंबे समय से विवाद

दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता हमेशा से चर्चा और विवाद का विषय रही है। मार्च 2024 तक क्लब में 5,018 स्थायी सदस्य और 27 लाइफ मेंबर थे। इसके अलावा करीब 3,000 यूसीपी (यूजर ऑफ क्लब प्रिमाइसेस) सदस्य और 5,000 से ज्यादा ग्रीन कार्ड होल्डर भी शामिल थे।

आरोप यह भी लगते रहे हैं कि स्थायी सदस्यों के बच्चों को पहले आश्रित सदस्य और फिर ग्रीन कार्ड होल्डर बनाकर क्लब में प्रवेश दिलाया जाता है, जबकि आम लोगों को सदस्यता पाने के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। कुछ मामलों में यह इंतजार 40 साल तक पहुंच गया है।

14000 से ज्यादा सदस्य, ‘मधुशाला’ बनाने का आरोप

दिल्ली जिमखाना क्लब पिछले कुछ वर्षों में आंतरिक गुटबाजी, वित्तीय अनियमितताओं और कुप्रबंधन के आरोपों को लेकर भी सुर्खियों में रहा है। रक्षा सेवाओं और सिविल सर्विस से जुड़े सदस्यों के बीच खींचतान हर चुनाव में खुलकर सामने आती रही है।

सरकारी एजेंसियों ने क्लब पर अपने मूल उद्देश्य से भटकने का आरोप भी लगाया था। सरकार की ओर से नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में दायर अपील में यहां तक कहा गया था कि दिल्ली जिमखाना क्लब को व्यायामशाला से मधुशाला बना दिया गया है। सरकार ने क्लब के संचालन के लिए सरकारी समिति नियुक्त करने की भी मांग की थी।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि दिल्ली जिमखाना क्लब इतनी मजबूत वित्तीय स्थिति है कि वह जमीन के लीज रिन्यूअल से जुड़े मामलों का सामना आसानी से कर सकता है। दरअसल केंद्र ने क्लब की करीब 27 एकड़ की कीमती जमीन को अगले हफ्ते तक वापस देने के लिए कहा है, जिससे देश के सबसे वीआईपी क्लब का भविष्य अब अधर में लटक गया है।

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