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Jantar Mantar Protest: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अलका लांबा को साल 2024 में जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण को लेकर किए गए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में दोषी करार दिया है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्वनी पनवार ने अलका लांबा को सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की करने के आरोपों में दोषी पाया। अदालत अब इस मामले में सजा की अवधि तय करने के लिए 5 जून को अगली सुनवाई करेगी।
यह पूरा मामला जुलाई 2024 का है, जब संसद के मानसून सत्र के दौरान जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने और महिला सुरक्षा की मांग को लेकर कांग्रेस का एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, उस क्षेत्र में प्रतिबंध लागू होने के बावजूद अलका लांबा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी तय सीमा से आगे बढ़ गए, जिसके बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
वीडियो साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया था कि अलका लांबा ने पहली बैरिकेडिंग पार की और महिला पुलिसकर्मियों को धक्का देते हुए आगे बढ़ीं। पूर्व में अलका लांबा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कोर्ट से ट्रायल की मांग की थी।
अदालत के दोषी ठहराए जाने के बाद अलका लांबा ने कहा, मुझे बिल्कुल इसी बात की उम्मीद थी। यह जुलाई 2024 का मामला है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा था। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते मैं और मेरी सभी बहनें लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत महिला सुरक्षा और महिला आरक्षण के लिए प्रदर्शन कर रही थीं। तब पुलिस ने दबाव में आकर मेरे खिलाफ एफआईआर और चार्जशीट दाखिल की थी। देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चीख-पुकार मची है, और अगर हम इसके खिलाफ लड़ते हैं, तो हमें ही दोषी ठहरा दिया जाता है। मैं डरने वाली नहीं हूं, मुझे जो भी सजा दी जाएगी मैं भुगतने को तैयार हूं।
Updated on:
25 May 2026 04:28 pm
Published on:
25 May 2026 04:07 pm
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