
Delhi High Court CJP protest : दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों के कारण आम जनता को हुई परेशानी और अव्यवस्था के एवज में 50 करोड़ का अंतरिम मुआवजा मांगने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता वकील से कहा कि वे इस राहत के लिए देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख करें, क्योंकि ऐसा ही मामला पहले से वहां विचाराधीन है।
बॉर एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब शीर्ष अदालत पहले से ही इसी तरह के मुद्दों पर सुनवाई कर रही है, तो हाईकोर्ट का हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि न्यायिक अनुशासन यह मांग करता है कि ऐसी स्थिति में इस अदालत को कार्यवाही से दूर रहना चाहिए और कोई विरोधाभासी आदेश पारित नहीं करना चाहिए।" इसके साथ ही पीठ ने इस जनहित याचिका (PIL) को निस्तारित (Dispose) कर दिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही इस विषय से जुड़े समान मामलों पर विचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार की तरफ से अपर सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और स्थायी वकील प्रेमतोष मिश्रा भी पेश हुए।
एडवोकेट राकेश कुमार सैनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके सहयोगियों पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
याचिका में आरोप लगाया गया कि विरोध प्रदर्शनों के कारण लुटियंस और मध्य दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम हुआ, जिससे व्यापारियों, दफ्तर जाने वालों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा; इसी के चलते याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि सीजेपी (CJP) पर सामुदायिक जुर्माना लगाया जाए, प्रभावित नागरिकों को मुआवजा देने के लिए ₹50 करोड़ की अंतरिम राशि जमा कराई जाए और इन दावों की जांच व मुआवजे की राशि तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।