जिलाधिकारी निर्देश दिए हैं कि स्कूल पांच साल से पहले ड्रैस नहीं बदलेंगे, किताबें खरीदने के लिए कई विकल्प होंगे, फीस स्ट्रक्चर तीन महीनें पहले पब्लिश करना होगा और वाहनों की डिटेल ऑनलाइन होगी।
DM Order स्कूल अब मनमानी नहीं कर सकेंगे। अगर किसी स्कूल ने बच्चों पर यूनिफॉर्म या किताबें, स्कूल या किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव बनाया तो स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि सहारनपुर जिलाधिकारी ने यह आदेश पारित किए हैं। जिलाधिकारी ने कहा है कि स्कूल बच्चों को महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। बच्चे अपने माता-पिता की हैसियत के अनुसार यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। अगर कोई स्कूल दबाव बनाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र 2026-27 शुरू हो गया है। इसी क्रम में सहारनपुर जिलाधिकारी ने सभी सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ बैठक की। इस बैठक में जिलाधिकारी मनीष कुमार बंसल ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित विद्यालय फीस वृद्धि विनियम अधिनियम के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि 60 दिन पूर्व ही सभी विद्यालयों को अपनी फीस वृद्धि एवं फीस का स्ट्रक्चर जारी करना होता है। कोई भी स्कूल अचानक से फीस में वृद्धि नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अभी तक महज 47 विद्यालयों ने अपना फीस स्ट्रक्चर जारी किया है। बाकी बचे 60 विद्यालयों की ओर से अभी तक कोई भी फीस स्ट्रक्चर जारी नहीं किया गया है। इन सभी स्कूलों को दो दिन के भीतर अपना फीस स्ट्रक्चर अपनी वेबसाइट अपलोड करने के साथ-साथ जिला विद्यालय निरीक्षक को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि सभी विद्यालय अपनी पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता कई स्थानों पर सुनिश्चित करेंगे । ऑफलाइन के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी विद्यालय की पाठ्य पुस्तक ऑनलाइन माध्यम से भी उपलब्ध रहें और इसकी सूचना उन्हें अपने बुक लिस्ट पर अंकित करनी होगी। किसी एक दुकान से किताबें खरीदने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो स्कूल संचालक के खिलाफ कार्रवाई होगी। FIR दर्ज करवाई जाएगी। बच्चे और अभिभावकों के पास अलग-अलग स्थानों से किताबें खरीदने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि कोई भी स्कूल पांच से पहले यूनिफॉर्म में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं कर सकेगा।अगर बहुत आवश्यक होगा तो उसके लिए कारण बताकर अनुमति लेनी होगी। सभी स्कूलों में अभिभावकों और बच्चों की समस्याओं के समाधान के लिए कठिनाई निवारण समिति का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक और अभिभावक होंगे। इनके समक्ष अभिभावक एवं छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। यदि इसके पश्चात भी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है तो अपनी समस्याओं के बारे में जिला अधिकारी कार्यालय में शिकायत कर सकेंगे।
इसके साथ ही स्कूलों से कहा गया है कि वह अपने वाहनों का फिटनेस रखेंगे। समय-समय पर जांच एआरटीओ से कराएंगे। एक अप्रैल से एक नया पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल पर सभी विद्यालयों को अपने वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अगर इस पोर्टल पर वाहन का रजिस्ट्रेशन नहीं है और वह वाहन स्कूली स्टाफ या बच्चों के ले जाते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।