नई दिल्ली

महिला आरक्षण के साथ दक्षिण को साधने की जुगत

नई दिल्ली। केन्द्र की मोदी सरकार लोकसभा में महिला आरक्षण जल्दी लागू करने की पहल के रूप में एक तीर से दो शिकार करने जा रही है। लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किए जाने से एक ओर 33% महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। साथ ही सीटों की संख्या आनुपातिक रूप से बढ़ाकर […]

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नई दिल्ली। केन्द्र की मोदी सरकार लोकसभा में महिला आरक्षण जल्दी लागू करने की पहल के रूप में एक तीर से दो शिकार करने जा रही है। लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किए जाने से एक ओर 33% महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। साथ ही सीटों की संख्या आनुपातिक रूप से बढ़ाकर परोक्ष परिसीमन कवायद से दक्षिण भारत के राज्यों की यह आशंका भी दूर होगी कि लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम होगा।

जानकार सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार फिलहाल विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर बातचीत कर रही है और आधिकारिक रूप से अभी योजना सामने नहीं आई है। यदि लोकसभा की सीटें 816 होती हैं तो बहुमत का मौजूदा आंकड़ा 272 से 409 पर पहुंच जाएगा। नए फॉर्मूले से भी लोकसभा में 120 सांसदों के साथ उत्तर प्रदेश का दबदबा कायम रहेगा। जबकि राजस्थान में 25 से बढक़र 38, मध्यप्रदेश में 29 से बढक़र 44 और छत्तीसगढ़ में 9 से बढक़र 17 सीटें हो सकेंगी।

संतुलन साधने की कोशिश, निर्वाचन क्षेत्र बदलेंगे

नई जनगणना व उसके आधार पर राज्यों में सीटों की घटत-बढ़त के आधार पर परिसीमन का दक्षिण राज्यों (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना व आंध्र प्रदेश) ने यह कहकर विरोध किया कि जनसंख्या कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के कारण उन्हें सीटें कम होने से प्रतिनिधित्व में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। केंद्र की येाजना में सीधे 50 फीसदी सीटें बढ़ाने से दक्षिणी राज्यों को यह शिकायत नहीं रहेगी क्योंकि उनका प्रतिनिधित्व अनुपात कायम रहेगा। सूत्रों के अनुसार महिला आरक्षण 2029 से लागू करने के लिए नई जनणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन कवायद की जाएगी जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा।

196 आरक्षित सीटें होंगी, उसमें भी महिला कोटा

वर्तमान में एससी के लिए 84 सीटें और एसटी के लिए 47 सीटें आरक्षित है। नए फॉर्मूले से एससी के लिए 126 और एसटी के लिए 70 सीटें आरक्षित हो सकेंगी। इनमें से एससी महिलाओं के लिए 42 और एसटी महिलाओं के लिए 27 सीटें आरक्षित हो सकती है।

विधानसभाओं में भी दिखेगा असर

यह फॉर्मूला केवल लोकसभा तक सीमित नहीं रहेगा। यदि इसे लागू किया गया, तो राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ेगी और महिला आरक्षण वहां भी लागू होगा।

छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर अभी स्थिति साफ नहीं

नगालैंड, मिजोरम, सिक्किम और लद्दाख जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या बढ़ेगी या नहीं, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है। फिलहाल यहां एक-एक सीट है, ऐसे में बढ़ोतरी और आरक्षण का स्वरूप अलग से तय करना होगा।

यूपी, महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल, तमिलनाडु का दबदबा कायम

राज्य वर्तमान में सीटें प्रस्तावित महिलाओं के लिए आरक्षित
उत्तर प्रदेश 80 120 40
महाराष्ट्र 48 72 24
पश्चिम बंगाल 42 63 21
बिहार 40 60 20
तमिलनाडु 39 59 20
मध्य प्रदेश 29 44 15
कर्नाटक 28 42 14
गुजरात 26 39 13
आंध्रप्रदेश 25 38 13
राजस्थान 25 38 13
ओडिशा 21 32 11
केरल 20 30 10
तेलंगाना 17 26 9
असम 14 21 7
झारखंड 14 21 7
पंजाब 13 20 7
छत्तीसगढ़ 11 17 6
हरियाणा 10 15 5
दिल्ली 7 11 4
उत्तराखंड 5 8 3
जम्मू-कश्मीर 5 8 3
हिमाचल प्रदेश 4 6 2
अरुणाचल प्रदेश 2 3 1
गोवा 2 3 1
त्रिपुरा 2 3 1
दादरा-नागर हवेली 2 3 1
मणिपुर 2 3 1
मेघालय 2 3 1

बिल के इस सत्र में आने की संभावना कम

महिला आरक्षण कानून में बदलाव से जुड़ा विधेयक मौजूदा संसद सत्र में लाए जाने की संभावना कम है। सूत्रों का कहना है कि सरकार फिलहाल इस पर आगे बढ़ने से पहले सभी राजनीतिक दलों से विस्तृत चर्चा करना चाहती है। इसके साथ ही बजट सत्र को समय से पहले स्थगित किया जा सकता है। हालांकि, सत्र को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा, ताकि जरूरत होने पर इसे दोबारा बुलाया जा सके। सरकार अप्रेल में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद सत्र फिर से बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। इन चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे।

Updated on:
25 Mar 2026 12:57 pm
Published on:
25 Mar 2026 12:56 pm
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