नई दिल्ली

हिंद साम्राज्य पार्टी को लगा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव चिह्न आदेश को ठहराया सही, याचिका की खारिज

Election Symbol Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव चिह्न आदेश 1968 को चुनौती देने वाली हिंद साम्राज्य पार्टी की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट के फैसले से हिंद साम्राज्य पार्टी को झटका लगा है ।
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दिल्ली हाईकोर्ट का चुनाव चिह्न आदेश 1968 को लेकर बड़ा फैसला

Election Symbol Case: शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। यह याचिका उत्तर प्रदेश की हिंद साम्राज्य पार्टी की तरफ से दायर की गई थी। यह मामला राजनीतिक दलों के बीच बराबरी और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी से संबंधित है। इस केस की सुनवाई जस्टिस नितिन वासुदेवो सांब्रे और जस्टिस अनिश दयाल की डिवीजन बेंच ने की। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में चुनाव चिह्न आदेश को रद करने और इसके प्रावधानों को लागू करने से रोकने की मांग रखी थी।

याचिका में क्या किया गया था दावा?

साल 2019 में हिंद साम्राज्य पार्टी ने एक याचिका दायर की जिसमें कहा गया था कि चुनाव चिह्न से जुड़ा 1968 का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए बराबरी के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिका में बताया गया कि इस आदेश के कारण कुछ पुराने राजनीतिक दलों को नए दलों से ज्यादा सुविधाएं और अधिकार मिलते हैं, जो सही नहीं है। पार्टी का कहना है कि सभी राजनीतिक दल एक ही वर्ग में आते हैं और एक ही वर्ग के अंदर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए और किसी भी पुराने दल को खास अधिकार नहीं मिलने चाहिए। साथ ही याचिका में यह भी कहा गया कि चुनाव आयोग के पास कोई अधिकार नहीं है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में लिखे गए नियमों को लागू करने के लिए वह अपने स्तर पर किसी तरह का नया कानून बनाए।

चुनाव आयोग का दलीलें

याचिका का विरोध करते हुए इलेक्शन कमीशन ने कहा कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की बेंच पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। कमीशन ने कहा कि चुनाव चिह्न से जुड़ा आदेश चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है। इसी की मदद से चुनाव आयोग निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव करवा पाता है। साथ ही आयोग ने यह भी बताया कि इस आदेश के तहत उन्होंने जो फैसले लिए हैं, उनको पहले भी सुप्रीम कोर्ट और बहुत से हाईकोर्ट सही मान चुके हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पेश की गई दलीलों को मद्देनजर रखते हुए चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता की मांगों को स्वीकार नहीं करते हुए चुनाव चिह्न से जुड़े आदेश को सही ठहराया।

अब जानिए चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के बारे में

चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 चुनाव आयोग का बनाया हुआ एक नियम है। इस नियम के तहत सभी राजनीतिक पार्टियों को चुनाव चिह्न दिए जाते हैं। यह नियम राजनीतिक पार्टियों को दो श्रेणियों में बांटता है। पहली श्रेणी में नेशनल या स्टेट लेवल की पार्टियों को रखा जाता है। इस श्रेणी की पार्टियों के लिए चुनाव चिह्न पहले से तय ही होते हैं, जैसे बीजेपी का कमल और कांग्रेस का हाथ। दूसरी श्रेणी में वो सभी पार्टियां शामिल होती हैं जो रजिस्टर्ड तो होती हैं, लेकिन इनको मान्यता नहीं मिली होती है। ऐसी पार्टियों को चुनाव चिह्नों की लिस्ट दी जाती है, जिसमें से वह कोई एक चिह्न चुन सकते हैं।

Updated on:
09 Jan 2026 01:56 pm
Published on:
09 Jan 2026 01:56 pm
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