
Greater Noida Executive Magistrate suspended; दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में शामिल एक छात्र को 5 लाख रुपये का शांति बंधपत्र (बॉन्ड) नोटिस जारी करने वाले ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट पर गाज गिरी है। उत्तर प्रदेश शासन ने कार्रवाई करते हुए संबंधित मजिस्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
भारत के सॉलिसिटर जनरल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की पीठ को प्रशासनिक कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी दी। इससे पहले, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शीर्ष अदालत के रोक के आदेश के बावजूद छात्र पर दंडात्मक नोटिस जारी करने पर गंभीर नाराजगी जताई थी और कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।
बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा प्रशासन के रवैये और कोर्ट के आदेश की अवमानना पर सख्त लहजे में कहा था कि 'किसी एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की यह हिम्मत कैसे हुई कि वह सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश का उल्लंघन करे? जब हमने पहले ही साफ कर दिया था कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं होगी, तब ऐसा नोटिस कैसे जारी किया गया? कोई भी अधिकारी अदालत के आदेश से ऊपर नहीं है।' सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त और आक्रामक रुख के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया, जिसके परिणामस्वरूप संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की त्वरित कार्रवाई की गई।
गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के तृतीय एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत 5 लाख रुपये का एहतियाती शांति बंधपत्र भरने का नोटिस भेजा था। पुलिस का आरोप था कि अक्षत ने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए प्रदर्शन में अन्य विद्यार्थियों को उकसाकर शामिल कराया, जिससे क्षेत्र में तनाव और शांति भंग होने की आशंका थी। हालांकि, अक्षत ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उसने केवल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि आंदोलन में शामिल छात्रों का उत्पीड़न नहीं किया जाए। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने पहले नोटिस वापस लिया और अब संबंधित दोषी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।