नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को एक साथ लाने के कारण विपक्ष ने लगातार अलग अलग कारणों से इस पर आपत्तियां जताईं। बिल को पुरस्थापित करते समय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ तौर पर कहा कि राज्यों की सीटों की संख्या में वर्तमान अनुपात […]
नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को एक साथ लाने के कारण विपक्ष ने लगातार अलग अलग कारणों से इस पर आपत्तियां जताईं। बिल को पुरस्थापित करते समय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ तौर पर कहा कि राज्यों की सीटों की संख्या में वर्तमान अनुपात ही रहेगा। मोदी ने अपनी बात रखते हुए कहा भी कि अमित भाई अपने जवाब में इसको और स्पष्ट करेंगे। पहले गृहमंत्री अमित शाह इसे शुक्रवार को बहस का जवाब देते समय स्पष्ट करने वाले थे लेकिन गुरुवार को ही प्रियंका गांधी के भाषण के बाद उन्होंने बिंदुवार हर बात का जवाब दिया।
पहली आशंका- दक्षिण की सदन में ताकत होगी कम?
जवाब- दक्षिण के राज्यों की सदन में ताकत नहीं बदलेगी। 543 के सदन में जितना अभी प्रतिशत है उतना बना रहेगा। अभी दक्षिण के राज्यों के 129 सांसद है जिनका 543 में 23.76% है। 850 की संख्या में यह 195 हो जाएगी और प्रतिशत होगा 23.97%।
दूसरी आशंका- परिसीमन बिल में कहां लिखा है? किसने कहा?
जवाब- इस बिल के प्रस्तावक के रूप में यह अधिकृत रूप से यह जानकारी रख रहा हूं। मैं अमित शाह भारत का गृह मंत्री कह रहा हूं। कल और डिटेल जवाब दूंगा।
तीसरी आशंका- जातीय जनगणना नहीं करवाना चाहते, जनगणना में जाति का कॉलम नहीं है?
जवाब- कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जातीय जनगणना का निर्णय कर लिया है। देश में जनगणना का काम शुरू हो गया है। अभी घरों की गणना हो रही है। इसमें जाति की आवश्यकता नहीं होती है। जातीय जनगणना करवाने की घोषणा हो चुकी है। जब व्यक्तियों की गणना होगी उसमें जाति का कॉलम होगा।
चौथी आशंका- 850 की संख्या कहां से आई ?
जवाब- काल्पनिक रूप से सोचें की सौ सीटें हैं, 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देना है तो उसमें पचास प्रतिशत बढ़ाने पर सीटें 150 होतीं हैं। जिसका तैंतीस प्रतिशत करने पर 100 सीटें रह जाएंगी। 543 सदस्य वर्तमान संख्या में पचास प्रतिशत सीटें बढ़ाने के बाद जो संख्या आएगी उसमें महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने के बाद भी 543 ओपन सीटें बचती हैं। जिसमें भी महिलाएं चुनाव लड़ सकते हैं। यह वर्तमान सदस्य संख्या के बराबर है। 850 का आंकड़ा इस प्रकार से आया है। 850 राउंडअप फिगर है। एक्जेक्ट संख्या 816 होगी।
पांचवी आशंका – डिलीमेटेशन कमीशन और अन्य प्रक्रियाओं से चुनाव में मैनीपुलेशन किया जाएगा
जवाब- पिछले डिलीमिटेशन के बिल में जैसी भाषा है वैसी ही भाषा है। कोई कोमा, फुलस्टॉप नहीं बदला गया है। हम मैनुपुलेशन नहीं करेंगे।
छठी आशंका – उत्तर प्रदेश और अन्य विधानसभाओं के चुनाव में ही नई व्यवस्था लागू हो जाएगी?
जवाब-2029 से पहले के सभी चुनाव पुरानी व्यवस्था से होंगे। इससे पहले किसी भी चुनाव में नई व्यवस्था लागू नहीं होगी।
सातवीं आशंका- सत्ता बनाए रखने की लालसा में यह बिल लाया गया है?
जवाब-लोकतंत्र में सत्ता नागरिक के वोट से ही तय होती है। 130 करोड़ के जनमत को किसी भी प्रकार से मैनीप्युलेट नहीं किया जा सकता है। आपातकाल के बाद के चुनाव में और अन्य चुनावों में भी यह नहीं हुआ। इसलिए ऐसा संभव नहीं है। जिन्होंने प्रयास किए लोकतंत्र ने उनको खत्म कर दिया।
| राज्य | मौजूदा सीटें | प्रतिशत | ये होंगी सीटें | प्रतिशत |
| कर्नाटक | 28 | 5.15% | 42 | 5.14% |
| आंध्र प्रदेश | 25 | 4.60% | 38 | 4.65% |
| तेलंगाना | 17 | 3.13% | 26 | 3.18% |
| तमिल नाडू | 39 | 7.18% | 59 | 7.23% |
| केरला | 20 | 3.68% | 30 | 3.67% |
| कुल (दक्षिण के) | 129 | 23.76% | 195 | 23.87% |