आपको बता दें कि इस मामले में जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने फाइलों का अध्ययन करने के बाद पाया कि आरोपी पर ट्रायल कोर्ट ने जो आरोप (Charge) तय किया था, वह केवल अपराध करने की 'कोशिश' (धारा 18) का था, न कि अपराध को 'अंजाम देने' का। इसके बाद सुवनाई के दौरान अदालत ने कहा, 'ट्रायल कोर्ट ने कभी भी 'कोशिश' के आरोप को बदलकर 'अपराध को अंजाम देने' का आरोप नहीं बनाया। जब आरोपी पर पूरे हुए अपराध का चार्ज ही नहीं लगाया गया, तो उसे उस अपराध के लिए दोषी ठहराना कानूनी तौर पर गलत है।'